Saturday, 2 March 2019

विंग कमांडर अभिनंदन सिंह का पकिस्तान से रिहा होने पर इमरान के बयान

1. सबसे पहले यह अच्छी तरह से समझ लें कि पाकिस्तान की राजनैतिक संरचना भारत से ठीक उलट है.
 वहाँ सबसे ऊपर सेना के सबसे ताक़तवर अधिकारियों द्वारा संचालित ऐजेंसी यानि आईएसआई, उसके नीचे सर्वशक्तिमान सेना, उन दोनों के नीचे पूरे मुल्क़ में फ़ैली दहशतगर्द तंज़ीमें और उन तंज़ीमों को वैचारिक तथा सामुदायिक सहायता देते मदरसों के आलिम और मौलाना, और इन सबसे नीचे लोकतांत्रिक ढाँचे के तीनों खंबे स्थित हैं.

इस समय वहाँ जिन इमरान ख़ान की निर्वाचित सरकार है वह इमरान ख़ान दरअसल ख़ुद में ही लोकतंत्र का फ़रेब बनाए रखने के लिए वहाँ की सर्वशक्तिमान ऐजेंसी आईएसआई तथा सेना द्वारा बैठाई गई एक आकर्षक कठपुतली भर हैं. वे जो भी कह या कर रहे हैं उसका एक-एक निर्देश आईएसआई के हेडक्वॉर्टर्स से जारी होता है. तो इमरान ख़ान को गाली या ताली कुछ भी देने से पहले समझ लें कि वह जा दरअसल कहीं और ही रही है.

2. 26 फ़रवरी की रात साढ़े तीन बजे ख़ुद ISPR (ISI का आधिकारिक प्रचार प्रकोष्ठ) के महानिदेशक मेजर जनरल आसिफ़ ग़फ़ूर ने सबसे पहले ट्वीट कर के बताया था कि हिंदुस्तान के लड़ाकू विमान LoC को अनधिकृत रूप से पार कर गए थे, और उन्होंने पाकिस्तान के अंदर ग़ैर-सैन्य ठिकानों पर बमबारी भी की.

आज उस हमले को 3 दिन हो जाने के बाद भी बारिश और कीचड़ का हवाला देकर दुनिया के किसी भी मीडिया संस्थान को अभी तक बालाकोट में घुसने नहीं दिया गया है और वहाँ पाकिस्तानी फ़ौज का सख़्त पहरा है.
 बीबीसी और रॉयटर्स की रिपोर्ट्स भी बालाकोट से कोई 4-5 मील दूर स्थित गाँवों में रहने वाले मज़दूरों से हुई बातचीत पर आधारित थीं, जिन्होंने उस रात तेज़ धमाकों की आवाज़ें सुनने की पुष्टि की.

3. अगले ही दिन, 27 फ़रवरी को इस मामले पर पाकिस्तान की संसद में बहस हुई जिसमें वहाँ सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों तरफ़ के वरिष्ठ नेताओं ने इस बात को खुल कर स्वीकार किया कि भारतीय फ़ौज के लड़ाकू विमान LoC से 80-90 किलोमीटर अंदर, ख़ैबर पख़्तूनवा तक पहुँचे थे और उन्होंने वहाँ बमबारी भी की. उस बहस के लगभग सारे वीडियोज़ इंटरनेट पर उपलब्ध हैं, आप ख़ुद देख सकते हैं.

4. अब ध्यान से सुनिए, किसी भी संप्रभु देश की सीमाओं में किसी भी देश के लड़ाकू विमानों का बिना अनुमति लिए दाख़िल होना और 80-90 किलोमीटर तक अंदर जाकर बमबारी करना ख़ुद-ब-ख़ुद 'Act Of War' अर्थात 'युद्ध की घोषणा' माना जाता है.
आपके घर में घुस कर कोई आपके मुँह पर ज़ोरदार तमाचा जड़े और आप उसे 'हवा का झोंका' बता कर खिसियानी हँसी हँस दें तब भी वह क़ानूनन हिंसात्मक आक्रमण ही रहेगा. जी हाँ , भारत ने युद्ध ही छेड़ा था पाकिस्तान के विरुद्ध.

5. भारत द्वारा पाकिस्तान पर साफ़-साफ़ युद्ध को निमंत्रण देते हुए किए गए इस खुले हमले से सबसे ज़्यादा नुकसान अगर किसी चीज़ का हुआ, तो वह पाकिस्तान की अभी तक चलती आ रही परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की धमकी के मनोवैज्ञानिक पर्दा था.

 यह धमकी देकर पाकिस्तान अब तक भारत के #SayNoToWar की तख़्ती पकड़े कबूतरदिल नागरिकों के झुंड में जो क़हर बरपा दिया करता था, इस हमले के बाद वह मनोवैज्ञानिक पर्दा हमेशा के लिए फट गया.

 भारत के विरुद्ध परमाणु युद्ध छेड़ना पाकिस्तान के लिए कैसा रूह कँपा देने वाला फ़ैसला होगा यह आप वहाँ के पूर्व सेनाध्यक्ष तथा राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ एक लंबी बातचीत में तफ़सील से बता चुके हैं,
और इस वक़्त भी वहाँ की सेना के शीर्ष पर बैठे लोग किसी मदरसे से निकले वज्रमूर्ख नहीं बल्कि अंग्रेज़ों द्वारा स्थापित मानक डिफेंस कॉलेजेज़ में पढ़े तेज़दिमाग़ प्रोफेशनली ट्रेंड आर्मी पर्सनल्स हैं.

यह धमकी सिर्फ़ एक पर्दा था जिसकी एक एक्सपायरी डेट थी. 26 फ़रवरी को वह एक्सपायरी डेट हमेशा के लिए पीछे छूट गई.

6. चूँकि भारत के विरुद्ध परमाणु युद्ध छेड़ना विकल्प नहीं था, अपने देश में अपनी ही लोकतांत्रिक सरकार की यकायक हुई इतनी बुरी फ़ज़ीहत के बाद वहाँ की फ़ौजी हुक़ूमत के सामने डैमेज कंट्रोल जो भी संभव रास्ते थे वह सरकारी प्रतिनिधियों द्वारा आनन-फ़ानन में उसी पल से आज़माए जाने लगे.

सबसे पहले 'इस्लामिक देशों के समूह' (O.I.C.) ने भारत के हमले की हल्की सी आलोचना तो की, लेकिन उससे ज़्यादा कुछ भी करने के सवाल पर टका सा जवाब दे दिया जिससे नाराज़ हो कर पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने उसके अगले कार्यक्रम में शिरकत करने से भी इनकार उसी दिन कर दिया.

7. लेकिन पाकिस्तान के हुक़्मरानों को इससे भी बड़ा झटका तब लगा, जब R.I.C. की सभा में चीन और रूस दोनों ने न सिर्फ़ भारत में आतंकी साज़िशें अंजाम देने के लिए पाकिस्तान की कड़ी आलोचना की, बल्कि उसकी सबसे बड़ी उम्मीद चीन ने भी इस मामले से पल्ला झाड़ते हुए दोनों देशों को अपने मसअले ख़ुद निपटाने के लिए कह दिया.

 सुनने में अजीब लगेगा, लेकिन इस्लामी एकता के नाम पर भी भारत के विरुद्ध पाकिस्तान का साथ देने का वायदा उसे सिर्फ़ सुदूर तुर्की से ही मिला, जिससे मिले साथ का कोई नैतिक मायना भले ही हो, उसकी कोई रणनीतिक प्रासंगिकता नगण्य ही है.

8. अब, जबकि परमाणु युद्ध की धमकी का पर्दा तार-तार हो चुका था, सीधा पारंपरिक युद्ध लड़ना कोई भी

तो किसी तरह से अपने लोगों का टूटता मनोबल बचाए रखने के लिए पाकिस्तान के फ़ौजी आक़ाओं ने LoC पार करने की बराबरी करने के लिए अपने कुछ लड़ाकू विमान भारत भेजे जो यहाँ के सैन्य ठिकानों पर हमला करने के लिए ही भेजे गए थे.
याद रखें यह भी साफ़-साफ़ 'Act Of War' ही था, जो सफल इसलिए नहीं हो पाया कि यहाँ पहले से तैयार बैठे लड़ाकू विमानों ने उनकी घेराबंदी कर के उन्हें वापस भेज दिया.

9. पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों को वापस भेजने की इसी कवायद में विंग कमांडर अभिनन्दन वर्थमान LoC पार कर गए और एक पाकिस्तानी F-16 विमान मार गिराने के बाद दुर्घटनाग्रस्त हुए अपने MiG-21 विमान से पैराशूट के ज़रिए कूद गए, और PoK में उतर कर पाकिस्तानी सेना द्वारा बन्दी बना लिए गए.

 ध्यान दें कि बन्दी बनाए जाते समय विंग कमांडर अभिनन्दन a) अपने लड़ाकू विमान समेत अनधिकृत रूप से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की सीमा में थे,

(b) पाकिस्तान के एक सैन्य विमान को मार कर नष्ट कर चुके थे, और c) वहाँ अपने किसी निजी काम से या जासूसी मिशन पर नहीं बल्कि पाकिस्तान द्वारा 'Act Of War' द्वारा छेड़े गए युद्ध पर ड्यूटी निभा रहे एक फ़ौजी अफ़सर की भूमिका में थे.

इन सारी बातों को ध्यान में रखते हुए, ऐसी कौन सी अंतर्राष्ट्रीय अदालत होगी जो विंग कमांडर अभिनन्दन वर्थमान को युद्धरत अवस्था में अपहृत एक सैनिक का दर्जा देते हुए उन्हें पाकिस्तान का 'युद्धबंदी' या 'Prisoner of War' (PoW) नहीं करेगी?

और वर्तमान समय में दुनिया भर में सभी युद्धबंदी या PoW, जेनेवा कन्वेंशन के तहत ही 7 दिनों के अंदर अनिवार्यतः छोड़े जाते हैं, जिसे न करने की दृष्टि में सीधा युद्ध अवश्यंभावी होता है.

और पाकिस्तान व दुनिया  यह अच्छी तरह से जानती भी है और मानती भी है कि भारत का वर्तमान नेतृत्व आक्रमण करने में एक मिनट की भी देरी नहीं करेगा ।
उन्हें अच्छी तरह से पता है कि भारत के पूर्व वाले नेतृत्व जिस के गुलाम पाकिस्तान आ कर पाकिस्तान से भारत के वर्तमान नेतृत्व को हटाने के लिये सहायता मांगते हैं से भारत का वर्तमान नेतृत्व सर्वथा भिन्न है।

जी हाँ, इमरान ख़ान ने भारत  के वर्तमान नेतृत्व  दबाव के चलते ही अभिनन्दन वर्थमान को छोड़ा है,

  लेकिन इतना जरूर है कि पाकिस्तान ने अपनी आतंकवाद के पोषक के रूपी हद से ज़्यादा कालिख़ पुत चुकी छवि को कुछ चमकाने की कोशिश ज़रूर की है उन्होंने इस रिहाई के बहाने.

और जिस तरह से कल तक #SayNoToWar की तख़्ती पकड़े भारत के कबूतरदिल नागरिकों के झुंड शांति के कबूतर उङा रहे हैं ,उनकी चमक का पेंट अपने चेहरे पर लगाए घूम रहे हैं, उससे लगता है कि कुछ हद तक भारत की कुछ अम्नपसंद कॉलोनियों में नोबेल शांति पुरस्कार जीतने में तो इमरान ख़ान सफल हो भी गए हैं.

 भारत की अम्नपसंद कॉलोनियों में रहने वाले #SayNoToWar की तख़्ती पकड़े कबूतरदिल नागरिकों के झुंडों द्वारा इमरान साहब को नोबेल शांति पुरस्कार मुबारक हो!

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