Saturday, 2 March 2019

पुलवामा, बालाकोट और विंग कमांडर अभिनंदन: उड़ता पाकिस्तान

मैं आज दिन भर से टीवी के न्यूज़ चैनल बदलता रहा हूँ या फिर बार बार  फेसबुक पर जाता रहा हूँ। मैं यह इस आशा से कर रहा था कि मुझे कुछ नया सुनने, देखने या पढ़ने को मिल जाये लेकिन बेहद निराशा हाथ लगी है। मुझे कुछ भी नया नही मिला, सिवाय विंग कमांडर अभिनंदन के भारत वापसी की लेकर लगातार टीवी वालो की रिपोर्टिंग या फिर विंग कमांडर अभिनंदन के स्वागत व भारत वापसी पर प्रसन्नचित लोगो की प्रतिक्रियाओं के।

यहां मुझे यह स्वीकारने में कोई लज्जा नही है कि यह सब देख कर मुझको बेहद झुंझलाहट हो रही है। मेरी समझ मे यह नही आरहा है कि जिस घटना पर मोहर कल 4 बजकर 38 मिनिट पर पाकिस्तान की संसद में उसके प्रधानमंत्री इमरान खान द्वारा मिमियाते हुये लगा दी थी उसको भारत की मीडिया ने इतना लंबा क्यों खींच दिया है। इसमे कोई शक नही है कि अति उत्साहित होंकर अपनी भावनाओं को प्रदर्शित करना अच्छी बात है लेकिन इस चक्कर मे मूल विषय या अन्य हुई महत्वपूर्ण घटनाओं को पूरी तरह अनदेखी कर देना भी ठीक नही है। इसका कारण यह है क्योंकि भारत की पाकिस्तान द्वारा प्रयोजित आतंकवाद व अलगावाद के विरुद्ध लड़ाई की कुंजियाँ उसमे ही अंतर्निहित है।

मेरा सत्य यह है कि पाकिस्तान के राजनैतिक वर्ग व जनता की इच्छा विरुद्ध, भारत की सेना द्वारा 5 बजे शाम को होने वाली अतिमहत्वपूर्ण प्रेस ब्रीफिंग से ठीक 15 मिनिट पहले, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान द्वारा विंग कमांडर अभिनंदन को अगले ही दिन भारत वापिस भेजे जाने की घोषणा से, अभिनंदन का अध्याय समाप्त हो गया था। उसके बाद जो कुछ भी हुआ वह सब पाकिस्तान द्वारा विश्व का ध्यान उसके यहां भारत द्वारा किये गए आतंकी कैम्पो पर किये गए हमले की शर्मिंदगी को छुपाने व जैश ए मोहम्मद के प्रमुख अजहर मसूद से हटाने के प्रयास का ही प्रतिफल है।

पाकिस्तान द्वारा भारतीय महाद्वीप के लोगो के भवनात्मक पक्ष की अतिरेकता का पर्याप्त दोहन करने के लिए, भारत स्थित उसके द्वारा अनुग्रहित किये गए राजनैतिज्ञों व मीडिया वालों के माध्यम से, उसके शांति के नरेटिव व विश्व मे इमरान खान को शांति का दूत के रूप में प्रतिस्थापित करने के लिए अथक परिश्रम किया जारहा है। इसी लिए विंग कमांडर अभिनंदन को भारत को सुपर्द करने में जो कुछ भी नाटकीयता पाकिस्तान की तरफ से हुई है, वो पूरी तरह भारत मे पाकिस्तानी समर्थक वर्ग के समर्थन से किया गया है।

पाकिस्तान का विंग कमांडर अभिनंदन को भारत वापिस किये जाने का निर्णय, डर में लिया गया निर्णय है। उसके द्वारा भारत की सीमा में अपने F 16 द्वारा घुस कर सैन्य ठिकानों पर आक्रमण करने के प्रयास को विश्व से कोई भी समर्थन न मिल पाना, उसके डर का सबसे बड़ा कारण बना है। पाकिस्तान को यह एक अप्रत्याषित कटु सत्य स्वीकार करना पड़ा है कि विश्व ने भारत द्वारा पाकिस्तान के अंदर युद्धक विमानों द्वारा किया गया हमला, पाकिस्तान के विरुद्ध न मानकर आतंकवादियों के विरुद्ध माना है। इसलिये विश्व के लिए, पाकिस्तान का भारत की जगह, भारत के विरुद्ध आक्रमणकर्ता के रूप में स्थापित हो जाना उसके लिए बुरी खबर थी।

अब यहां समझने की बात यह है कि अंतराष्ट्रीय कूटनीति में, राष्ट्राध्यक्षों के बीच हुई बाते कभी भी सार्वजनिक नही होती है लेकिन उनके मुहँ से निकले वाक्यों के निहतार्थों की विवेचना करने से या फिर उनके बॉडी लैंग्वेज से उसको समझा जरूर जाता है। वे कोई सार्वजनिक कोई संदेश देते है तब भी उनकी भावभंगिमा व उद्बोधन में प्रयोग किये गए शब्दो को निचोड़ कर समझा जाता है।

जब इमरान खान ने पुलवामा की घटना के बाद, टीवी पर भारत को सम्बोधित किया था, यदि उसकी विवेचना करे तो वह उस तरह बात कर रहा था जैसे थानेदार के समाने बैठा एक हिस्ट्रीशीटर अपने को बेगुनाह सिद्ध करने के लिए दलील दे रहा है। उस वक्त यह दिख रहा था कि इमरान की टांगे कांप रही थी। इस घटना के बाद भारत के प्रधानमंत्री मोदी जी द्वारा गंभीरता से सर्वजिनिक रूप से कम से कम तीन बार जब यह कहा कि पुलवामा की घटना करके, करने वाले ने बहुत बड़ी गलती कर दी है, तब यह संवाद, सिर्फ पाकिस्तान व आतंकवादियों के लिए नही बल्कि उन सबके लिए था, जो या तो पाकिस्तान के साथ खड़ा थे या फिर वे जो भविष्य में भारत पर किसी तरह का दबाव बना सकते थे।

इसी का परिणाम था कि अजहर मसूद को वांछित आतंकवादी घोषित कराए जाने के प्रयासों को रोकने वाला चीन, यूनाइटेड नेशन में जैश ए मोहम्मद को आतंकवादी संघठन घोषित किये जाने का सहभागी बना। पाकिस्तान को उससे ही समझ लेना चाहिए था लेकिन उसके बाद जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा यह कहा गया कि भारत कुछ बड़ा कर सकता है, वह तब भी उससे नही सिख पाया। पाकिस्तान का आंकलन यही था कि यह सब बातें स्थिति को सामान्य करने के लिए कही जारही है, लेकिन वह बुरी तरह चूक गया।

बाद में जब भारत द्वारा बालाकोट में स्थित जैश ए मोहम्मद के कैम्प को 1000 किलो के बमो से उड़ाये जाने के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने अपनी सेना के साथ आपात बैठक ली थी तब उसके वीडियो यही बताते है कि चमड़े की जैकेट और लाल मफलर पहने इमरान और बिना चमकती वर्दी के उसके सेना के अधिकारियों को कुछ नही पता था कि उनके साथ हुआ क्या है। ये सब सन्निपात के बराती दिख रहे थे।

इसके बाद पाकिस्तान ने किस प्रकार प्रतिक्रिया दी? पाकिस्तान में तब से अभी तक ब्लैकआउट का पालन होता है, उनके विश्विद्यालय बन्द कर दिए गए है और पूरे पाकिस्तान में वायुयान से यात्रा रोक दी गयी है, सऊदी के 3 बोइंग विमान से महत्वपूर्ण समान( यह आंकलन है कि न्यूक्लियर बम संबंघित है) सऊदी अरब भेज दिए जाते है और भारत मे इसके विपरीत सामान्य दिन चर्या चल रही है और भारत के प्रधानमंत्री मोदी जी अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रमो को कर रहे है।

अब इस सबके अंत मे जो समझने वाली बात है और जो मेरा आंकलन है कि पाकिस्तान स्थित व समर्थित जैश ए मोहम्मद द्वारा 14 फरवरी को पुलवामा में एक आत्मघाती हमले में भारत के 44 जवानों की हत्या के बाद, भारत ने जो पटकथा लिखी थी उसमे विंग कमांडर अभिनंदन का एपिसोड एक अप्रत्याशित घटना थी। यह एक ऐसी घटना थी जिसको लेकर कोई भी वैकल्पिक योजना किसी भी युद्धक पटकथा में नही होती है। इस तरह की घटनाओं को पटकथा के अनुकूल बनाना, राजनैतिक नेतृत्व के हाथ होता है, जिसका निर्वाह मोदी जी ने बड़ी कुशलता से किया है।

उन्होंने विंग कमांडर की भारत वापसी के लिए जेनेवा कन्वेंशन को हथियार बनाया और सऊदी अरब, चीन, रूस व अमेरिका के द्वारा, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को स्पष्ट रूप से संदेश भिजवा दिया कि विंग कमांडर अभिनंदन की तुरन्त भारत वापसी के अलावा अभी कोई बात सुननी ही नही है। अब तो यह सर्वजिनिक हो चुका है कि इमरान खान ने दो बार मोदी जी से बात करनी चाही थी लेकिन मोदी जी ने बात करने से इनकार कर दिया था। यही नही सऊदी अरब के दूत से यह भी कहलवा दिया था कि यदि 5 बजे तक पाकिस्तान ने अभिनंदन को छोड़े जाने की घोषणा नही की तो भारत पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों पर मिसाइल से हमला करे जाने की घोषणा करेगा।

यही कारण है कि इमरान खान ने हड़बड़ाते हुये संसद में विंग कमांडर अभिनंदन को भारत को सौंपने की घोषणा की और उसे 'शांति' का आवरण दिया। ताकि भारत मे बैठे पाकिस्तान के हितैषियों को नरेटिव बदलने का मौका मिल जाये और जनता भी इस प्रचार की बाढ़ में बह जाए। इसके पीछे यह सोंच थी कि जनता का ध्यान पुलवामा की 44 जवानों की लाशों और अज़हर मसूद से हट कर अभिनंदन की वापसी पर केंद्रित हो जाये और इमरान खान की छवि एक शांति का पुजारी बने और रक्तपात को जल्दी भूलने वाली जनता के लिए मोदी जी की छवि एक युद्धउन्मादी की बन जाये।

अभी रात के 11 बज रहे है और मैं सब देख व सुन रहा हूँ। अभी भी भारत मे स्थित पाकिस्तान समर्थित मीडिया और राजनैतिज्ञ विंग कमांडर अभिनंदन की भारत वापसी पर यही एजेंडा चला रहे है। लेकिन मैं बड़े विश्वास से कह सकता हूँ कि भारत द्वारा लिखी पटकथा में कोई बदलाव नही हुआ है। पाकिस्तान ने मोदी जी के चरित्र को लेकर अपने कांग्रेसी मित्रो व भारतीय मीडिया के सहयोगियों के आधार पर गलत आंकलन कर लिया है। मोदी जी, कभी भी, तमाम विघ्न आने के बाद भी, अपनी लिखी पटकथा से भटकते नही है।

मैं शिवरात्रि से तांडव व शक्ति के विहंगम नृत्य की अपेक्षा कर रहा हूँ। यह किस रूप में होगा उसकी विवेचना करने का मेरा सामर्थ नही है लेकिन जो भी होगा वह पाकिस्तान के अंधकारमय भविष्य की रचना करेगा

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