Tuesday, 19 March 2019

स्थायी बंदोबस्त

स्थायी बंदोबस्त क्या है 
                                    कार्नवालिस का शासनकाल अपने प्रशानिक सुधारों के लिए हमेशा याद किया जायेगा. उसने साम्राज्य विस्तार की और अधिक ध्यान न देकर आंतरिक सुधारों की ओर विशेष ध्यान दिया. कम्पनी शासन में निष्पक्षता और दृढ़ता लाने में उसे काफी सफलता मिली. उसने कम्पनी की सेवा, लगान व्यवस्था, न्याय और व्यापार सम्बन्धी अनेकों सुधार किये. लगान व्यवस्था के क्षेत्र में उसके द्वारा किया गया स्थायी बंदोबस्त (permanent settlement) ब्रिटिश शासन के इतिहास में महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है.
कार्नवालिस (Cornwallis) का सबसे महत्त्वपूर्ण सुधार राजस्व व्यवस्था एवं उसकी वसूली का प्रबंध करना था. अभी तक कंपनी वार्षिक ठेका के आधार पर लगान वसूलती थी. सबसे ऊंची बोली बोलने वाले को जमीन दी जाती थी. इससे कंपनी और किसान दोनों को परेशानी होती थी. लॉर्ड कार्नवालिस ने 1793 ई. में स्थायी व्यवस्था लागू की. स्थायी बंदोबस्त के आधार पर जमींदार भूमि के स्वामी बना दिए गए. जब तक जमींदार सरकार को निश्चित लगान देते रहते थे तब तक भूमि पर उनका अधिकार सुरक्षित रहता था. लगान नहीं देने की स्थिति में उन्हें अधिकार से वंचित किया जा सकता था. सरकार के साथ किसानों को कोई सम्बन्ध नहीं था. स्थाई बंदोबस्त को व्यवाहारिक रूप देकर कार्नवालिस भारत में जमींदारों का एक शक्तिशाली वर्ग तैयार करना चाहता था जो अंग्रेजों का हित चिन्तक रहे. लगान की रकम निश्चित कर देने से अंग्रेज़ अधिकारी भी प्रतिवर्ष लगान वसूलने के झंझट से मुक्त हो गए.

स्थायी बंदोबस्त से जमींदारों को लाभ

स्थायी बंदोबस्त से सबसे ज्यादा लाभ जमींदारों को हुआ. वे जमीन के वास्तविक स्वामी बन गए और उनका यह अधिकार वंशानुगत था. यह वर्ग भारत में ब्रिटिश साम्राज्य की जड़ को मजबूत करने में सहयोग करने लगे. दूसरी ओर भूमि पर स्थाई स्वामित्व ही जाने से वे कृषि विकास के कार्य में रूचि लेने लगे जिससे उत्पादन में वृद्धि होने लगी. उत्पादन में वृद्धि होने से जमींदारों को अधिक लाभ प्राप्त होने लगा. कंपनी को भी प्रतिवर्ष एक निश्चित आय की प्राप्ति होने लगी. वह बार-बार लगान निर्धारित करने तथा वसूलने के झंझट से मुक्त होकर अपना ध्यान प्रशासनिक क्षमता को बढ़ाने में लगाया. साथ ही अब लगान वसूलने के लिए कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं करने से धन की बचत होने लगी. उद्योग-धंधों के विकास और उत्पादन में वृद्धि होने से कंपनी को काफी लाभ हुआ.

स्थाई बंदोबस्त के बुरे परिणाम

दूसरी और स्थायी बंदोबस्त के कई बुरे परिणाम भी निकले. स्थाई बंदोबस्त में जमींदार और कंपनी के बीच समझौता था और किसानों को जमींदारों की दया पर छोड़ दिया गया. जमींदार किसानों का बेरहमी से शोषण करने लगे. किसानों से बेगार, भेंट और उपहार लिया जाने लगा. किसानों को जमीन पर कोई अधिकार नहीं रहा, वे सिर्फ जमीन पर कार्य करते थे. इस नयी व्यवस्था के कारण किसान दिनोंदिन गरीब होते चले गए. गरीब किसानों को अपने अधिकारों की रक्षा के लिए कोई कानूनी संरक्षण प्राप्त नहीं था. समाज में आर्थिक शोषण और सामाजिक विषमता की खाई बढ़ती चली गयी. जमींदार किसानों का शोषण कर धनवान बन गए और किसानों की दरिद्रता बढ़ती ही 

स्वामी दयानंद सरस्वती की जीवनी

उन्नीसवीं शताब्दी यूँ तो समाज सुधारकों और धर्म सुधारकों का युग है और इस युग में कई ऐसे महापुरुष हुए जिन्होनें समाज में व्याप्त अन्धकार को दूर कर नयी किरण दिखाने की चेष्टा की. इनमें आर्य समाज का नाम सर्वप्रमुख है. स्वामी दयानंद सरस्वती ने आर्य समाज के माध्यम से भारतीय संस्कृति को एक श्रेष्ठ संस्कृति के रूप में पुनर्स्थापित किया. ये हिन्दू समाज के रक्षक थे. आर्य समाज आन्दोलन भारत के बढ़ते पाश्चात्य प्रभावों की प्रतिक्रिया के रूप में हुआ था. उन्होंने 'वेदों की और लौटने - Back to Veda” का नारा बुलंद किया था. 

दयानंद सरस्वती का जन्म

स्वामी दयानंद सरस्वती का जन्म 1824 ई. में काठियावाड़, गुजरात में हुआ था. उनके बचपन का नाम मूलशंकर था. बालक मूलशंकर को अपने बाल्यकाल से ही सामजिक कुरीतियों और धार्मिक आडम्बरों से चिढ़ थी. स्वामी दयानंद को भारत के प्राचीन धर्म और संस्कृति में अटूट आस्था थी. उनका कहना था कि वेद भगवान् द्वारा प्रेरित हैं और समस्त ज्ञान के स्रोत हैं. उनके अनुसार वैदिक धर्म के प्रचार से ही व्यक्ति, समाज और देश की उन्नति संभव है. अतः दयानंद सरस्वती ने अपने देशवासियों को पुनः वेदों की ओर लौटने का सन्देश दिया. आर्य समाज की स्थापना के द्वारा उन्होंने हिन्दू समाज में नवचेतना का संचार किया.

कुरीतियों पर प्रहार

देश में प्रचलित सभी धार्मिक और सामजिक कुरीतियों के खिलाफ स्वामी दयानंद सरस्वती ने बड़ा कदम उठाया. उन्होंने जाति भेद, मूर्ति पूजा, सती-प्रथा, बहु विवाह, बाल विवाह, बलि-प्रथा आदि प्रथाओं का घोर विरोध किया. दयानंद सरस्वती ने पवित्र जीवन तथा प्राचीन हिन्दू आदर्श के पालन पर बल दिया. उन्होंने विधवा विवाह और नारी शिक्षा की भी वकालत की. सबसे ज्यादा उन्हें जाति व्यवस्था और अस्पृश्यता से चिढ़ थी और इसे समाप्त करने के लिए उन्होंने कई कठोर कदम उठाए. आर्य समाज की स्थापना कर उन्होंने अपने सारे विचारों को मूर्त रूप प्रदान करने की चेष्टा की. 1877 ई. में लाहौर में आर्य समाज के शाखा की स्थापना की गई थी 

आर्य समाज (Arya Samaj) के सिद्धांत 

  1. ईश्वर एक है, वह सत्य और विद्या का मूल स्रोत है.
  2. ईश्वर सर्वशक्तिमान, निराकार, न्यायकारी, दयालु, अजर, अमर और सर्वव्यापी है, अतः उसकी उपासना की जानी चाहिए.
  3. सच्चा ज्ञान वेदों में निहित है और आर्यों का परम धर्म वेदों का पठन-पाठन है.
  4. प्रत्येक व्यक्ति को सदा सत्य ग्रहण करने तथा असत्य का त्याग करने के लिए प्रस्तुत रहना 
स्वामी दयानंद सरस्वती ने आर्य समाज की स्थापना कर भारत के सामजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक जीवन को नई दिशा प्रदान की. वे दलितों के उत्थान, स्त्रियों के उद्धार के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी अभूतपूर्व कार्य किये. उन्होंने हिंदी भाषा और साहित्य को प्रोत्साहन दिया. हिंदी भाषा में ग्रंथों की रचना कर इन्होंने राष्ट्रीय गौरव बढ़ाया. इनके पूर्व भारतीय समाज में स्त्री शिक्षा की कोई भी व्यवस्था नहीं थी. इन्होंने स्त्रियों को शिक्षित बनाने पर बल दिया और वेद-पाठ करने की आज्ञा दी. संस्कृत भाषा के महत्त्व को पुनः स्थापित किया गया. इन्होनें ब्रह्मचर्य और चरित्र-निर्माण की दृष्टि से प्राचीन गुरुकुल प्रणाली के द्वारा छात्रों को शिक्षित करने की प्रथा शुरू की.
इस प्रकार स्वामी दयानंद सरस्वती ने आर्य समाज के माध्यम से न केवल हिन्दू धर्म को नया रूप देने की चेष्टा की बल्कि समाज में व्याप्त अनेक कुरीतियों को दूर कर उसे शिक्षित तथा सभी बनाने का प्रयास भी किया.

दयानंद सरस्वती की मृत्यु

दयानंद सरस्वती (Swami Dayanand Saraswati's demise) की मृत्यु के बाद आर्य समाज दो भागों में बँट गया. एक दल का नेतृत्व लाला हरदयाल करते थे जो पश्चिमी शिक्षा पद्धति के समर्थक थे, दूसरे दल का नेतृत्व महात्मा मुंशी राम करते थे जो प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति के समर्थक थे. आर्य समाज के प्रयास से अनेक अनाथालयों, गोशालाओं और विधवा आश्रमों का निर्माण किया गया. इस प्रकार हम देखते हैं कि दयानंद सरस्वती ने आर्य समाज आन्दोलन के माध्यम से हिन्दू समाज में नवचेतना और आत्मसम्मान का संचार किया. इस आन्दोलन के द्वारा धार्मिक और सामाजिक क्षेत्र में जो परिवर्तन हुआ उससे एक नयी राजनीतिक चेतना का जन्म हुआ और हमने अपनी संस्कृति की रक्षा हेतु अंग्रेजों के विरुद्ध आवाज़ बुलंद की.

जाटों की कहानी

मुग़ल शासक औरंगजेब के विरुद्ध विद्रोह करने के बाद 17 वीं सदी में शक्तिशाली भरतपुर राज्य की स्थापना के साथ जाट राज्य अस्तित्व में आया। विद्रोही मुख्यतः हरियाणा,पंजाब और गंगा दोआब के पश्चिमी भाग के ग्रामीण इलाकों में केन्द्रित थे और पूर्वी क्षेत्र में अनेक छोटे छोटे राज्य मिलते थे। ये प्राचीन व मध्यकालीन कृषक के साथ साथ महान योद्धा भी थे जिन्हें हिन्दू और मुस्लिम शासकों द्वारा सैनिक के रूप भर्ती किया गया था।
आगरा क्षेत्र के कुछ महत्वाकांक्षी जाट ज़मींदारों का मुग़ल,राजपूत और अफगानों के साथ संघर्ष भी हुआ क्योकि वे जाट जमींदार एक स्वतंत्र राज्य की स्थापना करना चाहते थे। सूरजमल एकमात्र जाट नेता था,  जिसने बिखरे हुए जाटों को एक शक्तिशाली राज्य के रूप में संगठित किया। कुछ प्रमुख जाट नेताओं का विवरण निम्नलिखित है-
  • गोकला: वह तिलपत का जमींदार था जिसने 1669 ई.में जाट विद्रोह का नेतृत्व किया था।लेकिन मुग़ल गवर्नर हसन अली द्वारा विद्रोह को दबा दिया गया और गोकला की मृत्यु हो गयी।
  • राजाराम: वह सिंसना का जमींदार था जिसने 1685 ई.में जाट विद्रोह का नेतृत्व किया।अमर के रजा बिशन सिंह कछवाहा द्वारा इस विद्रोह को दबा दिया गया।
  • चुडामन: वह राजाराम का भतीजा था जिसने 1704 ई.में मुगलों को हराकर सिंसनी पर कब्ज़ा कर लिया। इसने भरतपुर राज्य की स्थापना की और बहादुर शाह ने इसे मनसब प्रदान किया था। इसने बंदा बहादुर के विरुद्ध मुग़ल अभियान में मुगलों का साथ दिया था।
  • बदन सिंह: वह चुडामन का भतीजा था जिसे अहमद शाह अब्दाली ने राजा की उपाधि प्रदान की थी। उसे जाट राज्य भरतपुर का वास्तविक संस्थापक माना जाता है।
  • सूरजमल: वह बदनसिंह द्वारा गोद लिया गया पुत्र था ।उसे जाट शक्ति का प्लेटो  और जाट अफलातून  भी कहा जाता है क्योंकि उसने जाट राज्य को चरमोत्कर्ष पर पहुँचाया था। उसने दिल्ली,आगरा और मेवाड के क्षेत्रों में जाट अभियानों का नेतृत्व किया और पानीपत की तीसरी लड़ाई में मराठों की सहायता करने के लिए भी सहमत हुआ। पठानों द्वारा दिल्ली के पास उसकी हत्या कर दी गयी।
  • वर्तमान मे राजस्थान और हरियाणा के जाट साहसी है ।
निष्कर्ष
17 वीं सदी में मुगलों के विघटन के कारण जाटों के रूप में एक नयी लड़ाकू जाति का उदय हुआ,जिन्होंने स्वयं को  मध्य एशिया से भारत में प्रवेश करने वाले इंडो-सीथियन का वंशज घोषित किया। हालाँकि उन्होंने राज्य का गठन तो किया लेकिन उनकी आतंरिक संरचना जनजातीय संघ जैसी ही बनी रही और आगे भी बनी रहेगी ।

1909 का भारतीय परिषद अधिनियम

1909का भारतीय परिषद अधिनियम
                                                   1909 के भारत शासन  अधिनियम को , भारत सचीव और वायसराय नाम पर ,मोर्ले -मीन्टो सुधार भी कहा जा सकता है । इसका निर्माण उदारवादियों को संतुष्ट करने के लिये किया गया था । इस अधिनियम  द्वारा केन्द्रीय व प्रान्तीय विधान परिषदों के सदस्यों की  संख्या में वृद्धि की गई लेकिन इन परिषदों के सदस्योँ की सदस्य संख्या के आधे से भी कम थी अर्थात अभी भी नामनिर्देशित सदस्यों का बहुमत बना रहा| साथ ही निर्वाचित सदस्यों का निर्वाचन भी जनता द्वारा न होकर जमींदारों,व्यापारियों,उद्योगपतियों,विश्वविद्यालयों और  स्थानीय निकायों द्वारा किया जाता था| ब्रिटिशों ने सांप्रदायिक निर्वाचन मंडल का भी प्रारंभ किया जिसका उद्देश्य हिन्दू व मुस्लिमों के बीच मतभेद पैदा कर उनकी एकता को ख़त्म करना था| इस व्यवस्था के तहत परिषद् की कुछ सीटें मुस्लिमों के लिए आरक्षित कर दी गयी जिनका निर्वाचन भी मुस्लिमों मतदाताओं द्वारा ही किया जाना था|
इस व्यवस्था के द्वारा ब्रिटिश मुस्लिमों को राष्ट्रवादी आन्दोलन से अलग करना चाहते थे| उन्होंने मुस्लिमों को बहकाया कि उनके हित अन्य भारतीयों से अलग है | भारत के राष्ट्रवादी आन्दोलन को कमजोर करने के लिए अंग्रेज लगातार सम्प्रदायवाद को बढ़ावा देने वाली नीतियों का अनुसरण करते रहे| सम्प्रदायवाद के प्रसार ने भारतीय एकता और स्वतंत्रता के आन्दोलन को गंभीर रूप से प्रभावित किया| भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने 1909 ई. के अपने अधिवेशन में इस अधिनियम के अन्य सुधारों का तो स्वागत किया लेकिन धर्म के आधार पर प्रथक निर्वाचक मंडलों की स्थापना के प्रावधान का विरोध किया|
मॉर्ले-मिन्टो सुधारों ने परिषदों की शक्तियों में कोई महत्वपूर्ण परिवर्तन नहीं किया |इन सुधारों ने,स्वराज तो दूर, प्रतिनिधिक सरकार की स्थापना की ओर भी कोई कदम नहीं बढ़ाया | वास्तव में भारत सचिव ने स्वयं कहा कि भारत में संसदीय सरकार की स्थापना का उनका बिलकुल इरादा नहीं है| जिस निरंकुश सरकार की स्थापना 1857 के विद्रोह के बाद की गयी थी,उसमे मॉर्ले-मिन्टो सुधारों के बाद भी कोई बदलाव नहीं आया था |इतना अंतर जरुर आया कि सरकार अपनी पसंद के कुछ भारतीयों को उच्च पदों पर नियुक्त करने लगी| सत्येन्द्र प्रसाद सिन्हा ,जो बाद में लॉर्ड सिन्हा बन गए ,गवर्नर जनरल की कार्यकारी परिषद् में सदस्य नियुक्त होने वाले प्रथम भारतीय थे| बाद में उन्हें एक प्रान्त का गवर्नर बना दिया गया| वे भारत में पूरे ब्रिटिश शासनकाल के दौरान इतने उच्च पद पर पहुँचने वाले एकमात्र भारतीय थे| वे 1911 में दिल्ली में आयोजित किये गए शाही दरबार,जिसमें ब्रिटिश सम्राट जॉर्ज पंचम और उनकी महारानी उपस्थित हुई थीं, में भी उपस्थित रहे थे| दरवार में भर्तिया रजवाड़े भी शामिल हुए जिन्होंने ब्रिटिश सम्राट के प्रति अपनी निष्ठा प्रकट की| इस दरवार में दो महत्वपूर्ण घोषणाएं की गयीं ,प्रथम -1905 ई. से प्रभावी बंगाल के विभाजन को रद्द कर दिया गया ,द्वितीय –ब्रिटिश भारत की राजधानी कलकत्ता से दिल्ली स्थानन्तरित कर दी गयी|
अधिनियम की विशेषताएं
• इस अधिनियम ने विधान परिषदों की सदस्य संख्या का विस्तार किया और प्रत्यक्ष निर्वाचन को प्रारंभ किया|
• एक भारतीय को गवर्नर जनरल की कार्यकारी परिषद् का सदस्य नियुक्त किया गया |
• केंद्रीय विधान परिषद् के  निर्वाचित सदस्यों की संख्या 27 थी( जो 2 विशेष निर्वाचन मंडल ,13 सामान्य निर्वाचन मंडल और 12 वर्गीय निर्वाचन मंडल अर्थात 6 जमींदारों द्वारा निर्वाचित  व 6 मुस्लिम क्षेत्रों से निर्वाचित सदस्यों से मिलकर बनते थे)
• सत्येन्द्र प्रसाद सिन्हा गवर्नर जनरल की कार्यकारी परिषद् में सदस्य नियुक्त होने वाले प्रथम भारतीय थे|
• ‘प्रथक निर्वाचन मंडल ‘ के सिद्धांत का प्रारंभ किया गया|लॉर्ड मिन्टो को ‘सांप्रदायिक निर्वाचन मंडल का पिता’ कहा गया |
निष्कर्ष
1909 ई. के भारत शासन अधिनियम का निर्माण उदारवादियों को संतुष्ट करने के लिए और ‘प्रथक निर्वाचन मंडल ‘ के सिद्धांत द्वारा मुस्लिमों को राष्ट्रीय आन्दोलन से अलग करने के लिए किया गया 

सच्चे दोस्त कभी नहीं बदलते


























सच्चे दोस्त कभी भी किसी भी परिस्थति में नहीं बदलते:-

रिज़ल्ट अगर अच्छा हो ...




- मां : भगवान की कृपा है 
- पापा : बेटा किसका है 
- बहन : भाई किसका हैं
- दोस्त : चल दारू पीते हैं   🍸
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रिज़ल्ट अगर बुरा हो .......
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- माँ : आग लगे इस कॉलेज में *
- पापा : तुम्हारे लाड़ प्यार ने, बिगाड़ दिया *
- बहन : अगली बार कोशिश करना
- दोस्त : चल दारू पीते हैं **🍸🍸
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नौकरी लगने पर ...............
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- माँ : अपनी सेहत का ख़याल रखना 
- पापा : खूब मेहनत से काम करना 
- बहन: अपना ख्याल रखना
- दोस्त : चल दारू पीते हैं   🍸🍸
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नौकरी छूटने पर ..............
- माँ : नौकरी ही खराब थी **
- पापा : कोई बात नहीं, दूसरी मिल जाएगी
- बहन : जानेदो दूसरी मिल जाएँगी
- दोस्त : चल दारू पीते हैं *🍸🍸
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जन्मदिन पर ............
- माँ : जुग जुग जिए मेरा बेटा 
- पापा : हमेशा आगे बढ़ना 
- बहन : हमेशा खुश रहे मेरा भाई
- दोस्त : चल दारू पीते हैं   🍸🍸
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प्यार में नाकाम होने पर ........
- माँ : बेटा भूल जा उसको *
- पापा : मर्द बन बेटा *
- बहन : भाई दूसरी देख लेंगे
- दोस्त : चल दारू पीते हैं **🍸
.
शादी होने पर ...............
- माँ : सदा सुखी रहो 
- पापा : खुश रहो 
- बहन : अब अपनी बीबी का ख्याल रखना
- दोस्त : चल दारू पीते हैं   🍸
,
कहानी की शिक्षा :
दुनिया बदल जाती है पर साले दोस्त
कभी नहीं बदलते !! 

फिल्मी ड्रामा जोक

"कुछ हिंदी फ़िल्मी गीत जो कुछ बीमारियों का वर्णन करते हैं

गीत – जिया जले, जान जले, रात भर धुआं चले
बीमारी – बुखार

गीत – तड़प-तड़प के इस दिल से आह निकलती रही
बीमारी – हार्ट अटैक

गीत – सुहानी रात ढल चुकी है, न जाने तुम कब आओगे
बीमारी – कब्ज़

गीत – बीड़ी जलाई ले जिगर से पिया, जिगर म बड़ी आग है
बीमारी – एसिडिटी

गीत – तुझमे रब दिखता है, यारा मैं क्या करूँ
बीमारी – मोतियाबिंद

गीत – तुझे याद न मेरी आई किसी से अब क्या कहना
बीमारी – यादाश्त कमज़ोर

गीत – मन डोले मेरा तन डोले
बीमारी – चक्कर आना

गीत – टिप-टिप बरसा पानी, पानी ने आग लगाई
बीमारी – यूरिन इन्फेक्शन

गीत – जिया धड़क-धड़क जाये
बीमारी – उच्च रक्तचाप

गीत – हाय रे हाय नींद नहीं आये
बीमारी – अनिद्रा

गीत – बताना भी नहीं आता, छुपाना भी नहीं आता
बीमारी – बवासीर

और अंत में

गीत – लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है
बीमारी – दस्त

मारवाडी की मजाक

जज- कत्ल किसने किया?
आरोपी- मैनें किया ।
जज- लाश कहाँ है?
आरोपी- लाश मैनें जला दी ।
जज - वो जगह दिखाओ जहा लाश जलाई थी ?

आरोपी - मैने सारी जमीन खोद दी ।

जज - खोदी हुई मिट्टी कहा है? 

आरोपी - उसकी मैनें ईटे बना दी ।

जज - तो वो ईटे दिखाओ ?
आरोपी - मैनें उनसे मकान बना लिया ।

जज - वो मकान कहा है?
आरोपी - भूकम्प से गिर गया ।

जज - वो मलबा कहाँ है?
आरोपी - वो मैनें बेच दिया ।

जज - किसको बेचा?
आरोपी- पडौसी को ।

जज - पड़ोसी को बुलाओ?
आरोपी- वो मर गया ।

जज - किसने मारा?
आरोपी- मैनें मारा ।

जज - तो लाश किधर है ? 
आरोपी - लाश मैनें जला दी ।


जज - अबे उल्लु के पठे, तूने मर्डर किया है या सर्जिकल स्ट्राइक किया है , ह्त्या को कबूल भी कर रहा है और कोई सबूत भी नही दे रहा है मोदी का चेला है क्या ??👌👌

Monday, 18 March 2019

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का जन्म

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का जन्म :-
                                                  भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का श्रीगणेश 1885 में हुआ।  ए.ओ.ह्यूम इसके प्रणेता थे और प्रथम अध्यक्ष बने डब्ल्यू सी बनर्जी की अध्यक्षता में हुए इसके पहले अधिवेशन में ही कांग्रेस के प्रत्येक अधिवेशन में इस मांग को दोहराया विस्तार की मांग की।  इसके बाद कांग्रेस के प्रत्येक अधिवेशन में इस मांग को दोहराया गया।  हर वर्ष यह मांग पहले की अपेक्षा अधिक जोर पकड़ती गई।  कांग्रेस के विचार में ' सभी अन्य सुधारों के मूल में ' परिषदों का सुधार था।  कांग्रेस के पांचवें अधिवेशन में इस विषय पर बोलते हुए श्री सुरेन्द्रनाथ बनर्जी ने कहा था ;"यदि आपकी यह मांग पूरी हो जाती है , तो आपकी अन्य सभी मांगें पूरी हो जाएगी ; इस पर देश का समूचा भविष्य तथा हमारी प्रशासन व्यवस्था का भविष्य निर्भर करता है। "

1889 के अधिवेशन में जो प्रस्ताव पारित किया गया , उसमे गवर्नर - जनरल की परिषद तथा प्रांतीय विधान परिषदों में सुधार तथा उनके पुनर्गठन के लिए एक योजना की रूपरेखा दी गई थी और उसे ब्रिटिश पार्लियामेंट में पेश किये जाने वाले बिल में शामिल करने का सुझाव भी दिया गया था।  इस योजना में अन्य बातों के साथ - साथ यह मांग की गई थी कि भारत में 21 वर्ष से ऊपर के सभी पुरुष ब्रिटिश नागरिकों को मताधिकार तथा गुप्त मतदान पद्धति द्वारा मतदान करने का अधिकार दिया जाए। 1891 मे कांग्रेस ने अपने इस दृढ़ निश्च्य को दोहराया की जब तक भारत की जनता को उसके निर्वाचित प्रतिनिधियों के माध्यम से विधानमंडलों मे अपनी आवाज उठाने की इजाजत नहीं मिल जाती,तब तक भारत पर अच्छी तरह से शासन नहीं हो सकता । भारतीय परिषद एक्ट,1892 मुख्यतया भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 1889 से 1891 तक के अधिवेशनों मे सवीकार किये गए प्रस्तावों से प्रभावित होकर पारीत किया गया था । 1892 के एक्ट के अधीन, गवर्नर -जनरल की परीशद मे अतीरिक्त सदस्यों की संख्या बढाकर कम से कम दस तथा आधिक से अधिक सोलह कर दी गई ।।
इसी प्रकार,प्रान्तीय विधान परिषदों में भी अतिरिक्त सदस्यों की संख्या बढ़ा दी गई ।

Friday, 15 March 2019

प्राचीन भारत में संवैधानिक शासन प्रणाली

लोकतंत्र , प्रतीनिधी - संस्थान , शासकों की स्वेच्छाधारी शक्तियों पर अंकुश और विधि के शासन की संकल्पनाएँ प्राचीन भारत के लिए पराई नहीं थी। धर्म की सर्वोच्चता  की संकल्पना विधि के शासन या नियंत्रित सरकार की संकल्पना से भिन्न नहीं थी।  प्राचीन भारत में शासक धर्म से बंधे हुए थे ; कोई भी व्यक्ति धर्म का उल्ल्घन नहीं कर सकता था। ऐसे पर्याप्त प्रमाण सामने आये हैं , जिनसे पता चलता है कि प्राचीन भारत के अनेक भागों में गणतंत्र शासन - प्रणाली , प्रतीनिधी - विचारण मंडल और स्थानीय स्वशाषि संस्थाएं विध्यमान थी और वैदिक काल से ही लोकतांत्रिक चिंतन तथा व्यवहार लोगों के जीवन के विभिन्न पहलुओं में घर कर गए थे।
ऋगवेद तथा अथर्ववेद में सभा तथा समिति का उल्लेख मिलता है।  ऐतरेय ब्राह्मण ,पाणिनि की अष्टाधायी , कौटिल्य का अर्थशास्त्र , महाभारत , अशोक स्तम्भों पर उत्कीर्ण शिलालेख , उस काल के बौद्ध तथा जैन ग्रन्थ और मनुस्मृति - ये सभी इस बात के साक्ष्य है कि भारतीय इतिहास के वैदिकोत्तर काल में अनेक सक्रिय गणतंत्र विध्यमान थे।  विशेष रूप से महाभारत के बाद , विशाल साम्रज्यों के स्थान पर अनेक छोटे - छोटे गणतंत्र - राज्य अस्तित्व में आ गए। जातकों में इस प्रकार के अनेक उल्लेख मिलते है कि गणतंत्र किस तरह कार्य करते थे।
सदसयगण 'संथागार' में समवेत होते थे।  प्रतिनिधियों का चुनाव खुली सभा में किया जाता था।  वे अपने 'गोप' का चयन करते थे।  वह राजा बनता था तथा मंत्रिपरिषद की सहायता से शासन करता था।

ई.पू. चौथी शताब्दी में 'क्षुद्रक मल्ल संघ ' नामक गणतंत्र - परिसंघ ने सिकंदर का मुकाबला किया था।  पाटलिपुत्र के निकट लिच्वियां की राजधानी वैशाली थी।  वह राज्य एक गणतंत्र था।  उसका शासन एक सभा चलाती थी। उसका एक निर्वाचित अध्यक्ष होता था ,और उसे नायक कहा जाता था।  दुर्भाग्यवश , हमारे पास इन गणतंत्र के संविधान के विवरण के विषय में कोई अधिक जानकारी नहीं  है। यूनानी विद्वान् मैगेस्थनीज़ ने ऐसी जननिर्वाचित सभाओं के अभिलेख छोड़ें है जिन्हें दक्षिण में जीवित रखा गया था तथा जिन्होंने राजाओं की शक्तियों पर अंकुश लगाया हुआ था।  कौटिल्य के अर्थशास्त्र में भी इस बात का उल्लेख मिलता है कि प्राचीन भारतीय राज्य व्यवस्था में स्वेच्छाधारी शासन या राजाओं के देवी अधिकारों के लिए कोई स्थान नहीं था।  भारतीय राजा की शक्ति पर ऐसे प्रतिबंध लगा दिए गए थे जिससे कि वह उसका दुरूपयोग न कर सके। उसकी शक्ति को अन्य लोक  प्राधिकारियों तथा हितों के अधिकारों एवं शक्तियों द्वारा नियंत्रित कर दिया गया था।
वस्तुतया वह एक सिमित या संवैधानिक राजा था और जनता के बहुमत के आधार पर कार्य करता था।  मनु लिखते है कि जिस प्रकार पागल कुत्ते को मार दिया जाता है , उसी प्रकार अन्यायी तथा अत्याचारी राजा को उसकी अपनी प्रजा द्वारा मार दिया जाना चाहिए। 

Monday, 11 March 2019

पांच साल मे भारत में आए बदलाव

क्या पांच साल पहले किसी ने सोचा था ?

*क्या पांच साल पहले किसी ने सोचा था, गंगा नदी पर जहाज कोलकाता से सामान लेकर वाराणसी तक आएगा, अलकनंदा क्रूज शिप चलेगा ?

*क्या पांच साल पहले किसी ने सोचा था, गंगा जी कभी स्वच्छ होंगी ?

*क्या पांच साल पहले किसी ने सोचा था, विश्व का सबसे बड़ा स्टैचू भारत में होगा ?

*क्या पांच साल पहले किसी ने सोचा था, भारत एक साथ 104 सैटेलाइट अंतरिक्ष में छोड़ कर विश्व रिकॉर्ड बनाएगा ?

*क्या पांच साल पहले किसी ने सोचा था, सेना को और इस देश को राष्ट्रीय समर स्मारक मिलेगा ?


 *क्या पांच साल पहले किसी ने सोचा था, छोटे गरीब किसानों को सम्मान स्वरूप प्रतिवर्ष 6000 रुपए की धनराशि उनके बैंक खाते में सीधे जमा होगी ?


 *क्या पांच साल पहले किसी ने सोचा था, भारत अपनी हवाई कनेक्टिविटी का विस्तार करेगा, दूर दराज के इलाकों को भी हवाई कनेक्टिविटी से जोड़ा जाएगा ?

*क्या पांच साल पहले किसी ने सोचा था, नॉर्थ ईस्ट के सभी राज्यों को तेजी से रेल, हवाई व सड़क मार्ग से जोड़ा जाएगा ?

*क्या पांच साल पहले किसी ने सोचा था, देश का एविएशन सेक्टर 1000 हवाई जहजों के ऑर्डर देगा ?

* क्या पांच साल पहले किसी ने सोचा था, भारत 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनने के लिए तेज गति से अग्रसर होगा ?

* क्या पांच साल पहले किसी ने सोचा था, एसी ट्रेन में सफर करने वालो से ज्यादा लोग हवाई जहाज में सफर करेंगे ?

*क्या पांच साल पहले किसी ने सोचा था, हेलीकॉप्टर घोटाले का आरोपी क्रिश्चियन मिशेल को पकड़ कर भारत लाया जाएगा ?

* क्या पांच साल पहले किसी ने सोचा था, बड़ी बड़ी कंपनियों द्वारा, उद्योगपतियों द्वारा बैंको को 3 लाख करोड़ का कर्ज वापस किया जाएगा ?

* क्या पांच साल पहले किसी ने सोचा था, डीबीटी के माध्यम से देश के टैक्सपेयर्स का 1.09 लाख करोड़ रुपए से अधिक रुपया बचाया जाएगा ?

* क्या पांच साल पहले किसी ने सोचा था, भारत में निर्मित पहली भारत की इंजनलेस ट्रेन टी-18 180 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ने वाली पहली स्वदेशी ट्रेन होगी ?

* क्या पांच साल पहले किसी ने सोचा था, भारत में ट्रेन 18 जैसी सेमी बुलेट ट्रेन पटरियों पर दौड़ेगी और बुलेट ट्रेन का सपना साकार होगा ?

* क्या पांच साल पहले किसी ने सोचा था, भारतीय रेलवे का तेजी से विद्युतीकरण, आधुनिकीकरण और सौंदर्यीकरण किया जाएगा ?

* क्या पांच साल पहले किसी ने सोचा था, भारत की जीडीपी चीन, ब्रिटेन, अमेरिका, फ्रांस इत्यादि देशों से भी तेज गति से आगे बढ़ेगी ?

* क्या पांच साल पहले किसी ने सोचा था, देश के 1 करोड़ 53 लाख बेघरों के पास उनका पक्का घर होगा ?

* क्या पांच साल पहले किसी ने सोचा था, भारत की सौर्य ऊर्जा क्षमता 2.6 गीगावाट से बढ़ कर 23 गीगावाट पहुंच जाएगी ?

* क्या पांच साल पहले किसी ने सोचा था, देश का विकास दोगुनी तेजी से होगा ?

* क्या पांच साल पहले किसी ने सोचा था, 7 करोड़ गरीब परिवारों को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन दिया जाएगा ?


* क्या पांच साल पहले किसी ने सोचा था, देश की बैंको का पैसा लेकर विदेश भागने वाले लोगों की विदेशी संपत्तियां तक जब्त कर ली जाएगी ?

* क्या पांच साल पहले किसी ने सोचा था, देश के 18400 से अधिक गांवों में बिजली पहुंचेगी, देश के 98% घरों में बिजली कनेक्शन पहुंचेगा, एलिफेंटा द्वीप पर 70 वर्षो बाद समुद्र में केबल डाल कर बिजली पहुंचाई जाएगी ?


* क्या पांच साल पहले किसी ने सोचा था, गंगा नदी कभी स्वच्छ हो पाएगी ? गंगा नदी को एशिया के सबसे बड़े नाले (सीसामऊ नाला) से मुक्ति मिलेगी देश कभी स्वच्छ हो पाएगा ? भोपाल को स्वच्छता रैंकिंग में पहला स्थान मिलेगा ?

* क्या पांच साल पहले किसी ने सोचा था, 9.78 करोड़ से अधिक घरों में शौचालय बनवाए जाएंगे ?

* क्या पांच साल पहले किसी ने सोचा था, भारत का क्रूड ऑयल रिजर्व बढ़ेगा ?

* क्या पांच साल पहले किसी ने सोचा था, भारत को विश्व में इतना सम्मान, मिलेगा, की ओपेक जैसे संगठनों का जिसका भारत सदस्य तक नहीं है कोई भी फैसला भारत से पूछे बिना नहीं किया जाएगा ? भारत के पासपोर्ट को नई पहचान मिलेगी ?

* क्या पांच साल पहले किसी ने सोचा था, अयोध्या में भव्य दीपावली, रामलीला का आयोजन किया जाएगा ?

* क्या पांच साल पहले किसी ने सोचा था, भारत की सेना विश्व की चौथी सबसे ताकतवर सेना बन जाएगी ? सेना की मजबूती के लिए बड़े बड़े रक्षा सौदे किए जाएंगे ?

* क्या पांच साल पहले किसी ने सोचा था, 16.35 करोड़ से अधिक लोगों को मुद्रा लोन के जरिए स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया जाएगा ?

* क्या पांच साल पहले किसी ने सोचा था, आजादी के भूले बिसरे स्वतंत्रता सेनानीयों, सुभाष चन्द्र बोस को, उनका उचित सम्मान मिलेगा ?

* क्या पांच साल पहले किसी ने सोचा था, 1984 के सिख नर संहार के दोषी कांग्रेस के नेताओ को सजा मिलेगी ?

* क्या पांच साल पहले किसी ने सोचा था, स्विस बैंक भारतीय खाता धारकों की पूरी डिटेल सौंपने को राजी होगा ?

* क्या पांच साल पहले किसी ने सोचा था, देश के 34.73 करोड़ से अधिक गरीब लोगो के जन धन खाते खुलवाकर उनको बैंकिंग सिस्टम से जोड़ा जाएगा ?

* क्या पांच साल पहले किसी ने सोचा था, पाकिस्तान और चीन से युद्ध लड़ने वाले सैनिकों को वन रैंक वन पेंशन दिया जाएगा ?

* क्या पांच साल पहले ये भी नहीं सोचा होगा कि 18.87 करोड़ किसानों की भूमि के स्वास्थ की जानकारी के लिए सॉइल हेल्थ कार्ड जारी किए जाएंगे.

* क्या पांच साल पहले किसी ने सोचा नहीं होगा, उसके शहर में उसके घर में पाइपलाइन के जरिए एलपीजी गैस पहुंचेगी.

* क्या पांच साल पहले किसी ने सोचा था, बिजली की कमी से जूझ रहे भारत में इतना बिजली उत्पादन होगा कि भारत अपने पड़ोसी देशों को बिजली सप्लाई करेगा ?

* क्या पांच साल पहले किसी ने सोचा था, भारत माला, सागर माला जैसी बड़ी परियोजनाओं से देश के दूर दराज के इलाके जलमार्गों और राजमार्गो से जुड़ेंगे ?

* क्या पांच साल पहले किसी ने सोचा था, भारत जैसे देश में बुलेट ट्रेन चलेगी ? आज बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पर तेज गति से काम चल रहा है.

* क्या पांच साल पहले किसी ने सोचा था, भारत मिशन गगनयान के तहत 2022 तक या उससे पहले अंतरिक्ष में मानव को भेजेगा ?

* क्या पांच साल पहले किसी ने सोचा था, भारत में गरीबों के स्वास्थ के लिए आयुष्मान भारत जैसी योजना आएगी, जिसमें 5 लाख प्रति वर्ष तक का इलाज मुफ्त किसी भी अस्पताल में मिलेगा, आज यह हकीकत बन चुका है अब तक 14.55 लाख से ज्यादा गरीबों ने इस योजना का लाभ भी उठाया है.


* क्या पांच साल पहले किसी ने सोचा था, महंगी दवाइयों के कारण इलाज कराने में असमर्थ लोग जेनेरिक दवाइयों का लाभ लेंगे ? आज देशभर में 5050 से अधिक प्रधानमन्त्री भारतीय जन औषधि केंद्र खोले जा चुके है.

* क्या पांच साल पहले किसी ने सोचा था, कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के इलाज के लिए 390 दवाइयों के दाम 87% तक कम हो जाएंगे ?

* क्या पांच साल पहले किसी ने सोचा था, की ड्राइविंग लाइसेंस, आरसी इत्यादि जरूरी दस्तावेजों की सॉफ्ट कॉपी अपने मोबाइल फोन, डिजी लॉकर ऐप पर सुरक्षित करने और जरूरत पड़ने पर उसको दिखाने पर वो वैध माने जाएंगे ?

* क्या पांच साल पहले किसी ने कल्पना की थी कि सरकारी काम काज में इतना ट्रांसपेरेंसी आएगी ? टेंडरिंग प्रक्रिया ऑनलाइन होगी, भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया ऑनलाइन होगी, व अन्य सभी परियोजनाओं की स्थिति ऑनलाइन पोर्टल पर देखने को मिल जाएगी ?

* क्या पांच साल पहले किसी ने सोचा था, भारत मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग का ग्लोबल हब बनेगा ?

* क्या पांच साल पहले किसी ने सोचा था, 3 लाख से अधिक फर्जी कंपनियों पर ताले लगाए जाएंगे, रजिस्ट्रेशन रद्द किया जाएगा ?

* क्या पांच साल पहले किसी ने सोचा था, भारत ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की रैंकिंग में 142 से 77 पर आ जाएगा ? आज भारत टॉप 50 में पहुंचने के लिए तेज़ी से आगे बढ़ रहा है.

* क्या पांच साल पहले किसी ने सोचा था, भारत विश्व में तेज गति से गरीबी हटाने वाला देश बन जाएगा ?

* क्या पांच साल पहले किसी ने सोचा था, भारत रूस, जापान, ईरान, सऊदी अरब जैसे देशों के साथ डॉलर की जगह रुपए में व्यापार करेगा ?


* क्या पांच साल पहले किसी ने सोचा था, भारत में उद्योगों के लिए पर्यावरण क्लीयरेंस प्रक्रिया को आसान बनाया जाएगा, ऑनलाइन किया जाएगा ?

* क्या पांच साल पहले किसी ने सोचा था, भारत भी सर्जिकल स्ट्राइक कर सकता है, उसी भाषा में जवाब दे सकता है, चीन के सामने 72 दिनों तक सीना तान के खड़ा हो सकता है वो भी अपने मित्र देश भूटान के लिए ?

* क्या पांच साल पहले किसी ने सोचा था, भारत एयर स्ट्राइक करके पाकिस्तानी आतंकवाद से अपने जवानों के बलिदान का बदला लेगा ?

🙌 पांच साल पहले आपने बहुत कुछ नहीं सोचा होगा जो आज पांच साल बाद मोदी सरकार के कारण संभव है 

प्रवेश पत्र नहीं देने पर परीक्षा से वंचित रहे विद्यार्थियों ने कलेक्टर को ज्ञापन दिया, डीईओ ने जांच कमेटी बनाई

Sikar News - स्कूल प्रबंधन द्वारा 12वीं बोर्ड के सात विद्यार्थियों को प्रवेश पत्र नहीं देने के चलते ये विद्यार्थी गुरुवार को...


स्कूल प्रबंधन द्वारा 12वीं बोर्ड के सात विद्यार्थियों को प्रवेश पत्र नहीं देने के चलते ये विद्यार्थी गुरुवार को अंग्रेजी विषय की परीक्षा नहीं दे पाए थे। डीईओ की ओर से एआर मेमोरियल सीनियर सैकंडरी स्कूल फतेहपुर रोड के निदेशक व प्रिंसिपल को फटकार लगाने के बाद विद्यार्थियों को प्रवेश पत्र दिए गए थे। डीईओ मुकेश कुमार मेहता ने जांच कमेटी गठित की। विद्यार्थियों ने शुक्रवार को कलेक्टर व डीईओ को ज्ञापन दिया।

विद्यार्थियों को प्रवेश पत्र नहीं मिलने के चलते वे अंग्रेजी विषय की परीक्षा नहीं दे पाए। इसके चलते अब उन्हें सप्लीमेंट्री परीक्षा देनी होगी। सप्लीमेंट्री परीक्षा के सिर्फ पासिंग मार्क्स ही जुड़ते हैं। ऐसे में विद्यार्थियों के रिजल्ट पर असर पड़ेगा। स्कूल निदेशक ने विद्यार्थियों इमरान, जाहिद, आयुष, नदीम शेख, सोहेल, सोयल, सबाउद्दीन को प्रवेश पत्र नहीं दिए थे। इनमें से कई विद्यार्थी साइंस मैथ्स व बायो के हैं। विद्यार्थियाें ने कलेक्टर सीआर मीणा से मिलकर उन्हें माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष के नाम स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग को लेकर ज्ञापन दिया। इस पर कलेक्टर ने कहा कि पूरे मामले को दिखवाता हूं, जांच करवाकर स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। ज्ञापन में विद्यार्थियों ने लिखा है कि वे पिछले चार-पांच दिन से प्रवेश पत्र लेने के लिए विद्यालय के चक्कर लगा रहे थे, लेकिन निदेशक मोहम्मद तौफिक चौहान ने पूरी फीस, प्रायोगिक परीक्षा की फीस जमा कराए बिना प्रवेश पत्र देने से मना कर दिया था। राजस्थान राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य एसपीसिंह ख्यालिया ने कहा कि यह बहुत गंभीर मामला है। विद्यालय प्रबंधन किसी भी हालात में विद्यार्थियों के प्रवेश पत्र नहीं रोक सकता। विद्यार्थियों को फीस के लिए घर भेजना भी प्रताड़ना के तहत आता है।

जांच कमेटी ने स्टाफ व विद्यार्थियों के बयान लिए : माध्यमिक शिक्षा के डीईओ मुकेश कुमार मेहता ने जांच कमेटी गठित की है। जांच कमेटी ने एआर मेमोरियल सीसै स्कूल के अध्यापकों व निदेशक के बयान लिए हैं। परीक्षा से वंचित रहे चार विद्यार्थियों के बयान लिए हैं। अन्य तीन विद्यार्थियों के बयान शनिवार को लिए जाएंगे। स्कूल के दस्तावेज, एसआर रजिस्टर, फीस लेने का रजिस्टर आदि देखे हैं।

सेना के लिए मोदी सरकार की एक अच्छी शुरुआत

*सुपरस्टार अक्षय कुमार के सुझाव पर मोदी सरकारका एक और अच्छा फैसला :* ........
एक रूपये मात्र रोज का भुगतान वो भी भारतीय सेना के लिए। मोदी सरकार ने कल कैबिनेट की मीटिंग में भारतीय सेना की आधुनिकता और सेना के जवानो जो कि युद्ध क्षेत्र में घायल होते है या शहीद होते है उनके लिए एक बैंक अकाउंट खोल ही दिया।जिसमे हर भारतीय अपनी स्वेक्षा से कितना भी दान दे सकता है। जो कि 1 रुपए से शुरू होकर असीमित  है।

इस पैसे का प्रयोग सेना तथा अर्धसैनिक बलो के लिए हथियार खरीदना भी होगा । मन की बात तथा फेसबुक, ट्वीटर,व्हाट्सएप्प पर लोगो के सुझाव पर आज के जलते हालात पर मोदी सरकार ने अंततः फैसला लेते हुए नई दिल्ली, *सिंडिकेट बैंक में आर्मी वेलफेयर फण्ड बैटल कैजुअल्टी फण्ड अकाउंट खोला है।*

यह *Film Star Akshay Kumar* का मास्टर स्ट्रोक है। जहाँ से भारत को सुपर पॉवर बनने से कोई नहीं रोक सकता। भारत की 130 करोड़ जनसंख्या में से अगर 70% भी केवल एक रुपया इस फण्ड में रोज़ डालते है तो वो 1 रुपये एक दिन में 100 करोड़ होगा। 30 दिन में 3000 करोड़ और 36000 करोड़ एक साल में। 36,000 करोड़ तो पाकिस्तान का सालाना रक्षा बजट भी नहीं है । हमलोग प्रतिदिन 100 या 1000 रुपया रोज़ फालतू के काम में खर्च कर देते है लेकिन यदि हमलोग एक रूपये सेना के लिए दिया तो सचमुच भारत एक सुपर पॉवर जरूर बनेगा।

आपका ये रुपया सीधे रक्षा मंत्रालय के सेना सहायता एवं वॉर कैजुअल्टी फण्ड में जमा होगा। जो सैन्य सामग्री और सेना के जवानो के काम आएगा

*इसलिए मोदीजी के इस अभियान से जुड़कर सीधे तौर पर सेना की मदद करें।*
 पाकिस्तान हाय हाय कर, सड़क जाम करने और बयानबाजी करने से कुछ नहीं होगा। मोदी और देश की जनता की सोच को अमलीजामा पहनाये और अपने देश की सेना को मजबूत बनाये। जिससे पकिस्तान और चीन जैसे देशो को उसकी बिना किसी देश की सहायता से उनकी औकात बता सके। बैंक डिटेल्स नीचे दिए गए है।

*Bank Details:*

*SYNDICATE BANK*
*A/C NAME: ARMY WELFARE FUND BATTLE CASUALTIES,*
*A/C NO:* *90552010165915*
*IFSC CODE:* *SYNB0009055*
*SOUTH EXTENSION BRANCH,NEW DELHI.*


Thursday, 7 March 2019

जिन्दगी के सच


 🌻बहुत सुन्दर पंक्तिया,
                              जरूर पढे🌻

🌹एक दिन एक चिड़िया चिड़े से बोली - तुम मुझे छोड़ कर कभी उड़ तो नहीं जाओगे❣

🌹चिड़े ने कहा - उड़
जाऊं तो तुम पकड़ लेना❣

🌹चिड़िया - मैं तुम्हें पकड़
तो सकती हूँ,
पर फिर पा तो नहीं सकती...❣

🌹यह सुन चिड़े की आँखों में आंसू आ गए और उसने अपने पंख तोड़ दिए और बोला अब हम
हमेशा साथ रहेंगे❣

🌹लेकिन एक दिन जोर से तूफान आया,
चिड़िया उड़ने लगी तभी चिड़ा बोला तुम उड़
जाओ मैं नहीं उड़ सकता..❣

🌹चिड़िया- अच्छा अपना ख्याल रखना, कहकर
उड़ गई !❣

🌹जब तूफान थमा और चिड़िया वापस
आई तो उसने देखा की चिड़ा मर चुका था❣
❣और एक डाली पर लिखा था...❣

✍काश तुम एक बार तो कहती कि मैं तुम्हें नहीं छोड़ सकती ,,,,,❣
🌹तो शायद मैं तूफ़ान आने से
पहले नहीं मरता

 ज़िन्दगी के पाँच सच ~
नं. 1 -:
माँ के सिवा कोई वफादार नही हो सकता…!!!
────────────────────────
2 -:
गरीब का कोई दोस्त नही हो सकता…!!
────────────────────────
3 -:
आज भी लोग अच्छी सोच को नही,
अच्छी सूरत को तरजीह देते हैं…!!!
────────────────────────
 4 -:
इज्जत सिर्फ पैसे की है, इंसान की नही…!!!
────────────────────────
 न. 5 -:
जिस शख्स को अपना खास समझो….
अधिकतर वही शख्स दुख दर्द देता है…

Tuesday, 5 March 2019

मासूम बेटी की पुकार

मैं भी जीना चाहती हूँ
तेरे आँचल मे सांस लेना चाहती हूँ,
तेरी ममता की छांव मे रहना चाहती हूँ
तेरी गोद मे सोना चाहती हूँ।

मैं भी तो तेरा ही अंश हूँ,
फिर कैसे तू मुझे खुद से
अलग कर सकती है ?
तू तो माँ मेरी अपनी है
फिर क्यों….?😥😥

क्या बेटी होना ही कसूर है मेरा …..?
जो तू भी मुझे पराया करना चाहती है…!!
तू भी नहीं तो फिर कौन होगा मेरा अपना ?
क्यों मेरे जज्बातों को कुचल देना चाहती है ?
जीवन देने से पहले ही क्यों मार देना चाहती है ?😥😥



समय पर इन्सान की अहमियत को पहचानो

एक औरत थी,
जो अंधी थी❗
जिसके कारण उसके बेटे को
स्कूल
में बच्चे चिढाते थे❗
कि अंधी का बेटा आ गया,❗
हर बात पर उसे ये शब्द
सुनने
को मिलता था कि "अन्धी
का बेटा" ❗
इसलिए वो अपनी माँ से
चिडता था ❗ उसे
कही भी अपने
साथ लेकर जाने में
हिचकता था❗
उसे नापसंद करता था..❗
उसकी माँ ने उसे पढ़ाया..
और उसे इस लायक बना
दिया की वो अपने पैरो
पर
खड़ा हो सके..
लेकिन जब वो बड़ा आदमी
बन
गया तो अपनी माँ को
छोड़
अलग रहने लगा..❗
एक दिन एक बूढी औरत
उसके घर
आई और गार्ड से बोली..
मुझे तुम्हारे साहब से
मिलना है जब गार्ड ने
अपने मालिक से
बोल तो मालिक ने कहा
कि बोल
दो मै अभी घर पर नही हूँ.❗
गार्ड ने जब बुढिया से
बोला कि वो अभी नही
है..‼
तो वो वहा से चली
गयी..‼
थोड़ी देर बाद जब लड़का
अपनी कार से
ऑफिस के लिए
जा रहा होता है..❗
तो देखता है कि सामने
बहुत भीड़
लगी है..❗
और जानने के लिए कि वहा
क्यों भीड़
लगी है वह
वहा गया तो देखा उसकी
माँ वहा मरी पड़ी थी..❗
उसने
देखा की उसकी मुट्ठी में
कुछ है❗उसने जब
मुट्ठी खोली तो देखा की
एक
लेटर जिसमे यह
लिखा था कि बेटा जब तू
छोटा था तो खेलते वक़्त
तेरी आँख में सरिया धंस
गयी थी और तू
अँधा हो गया था तो मैंने
तुम्हे
अपनी आँखे दे दी थी..❗
इतना पढ़ कर लड़का जोर-
जोर से
रोने लगा..❗
उसकी माँ उसके पास नही

सकती थी..
दोस्तों वक़्त रहते ही
लोगो की वैल्यू
करना सीखो..❗
माँ-बाप का कर्ज हम
कभी नही चूका सकत..
हमारी प्यास का अंदाज़
भी अलग है
दोस्तों,❗
कभी समंदर को ठुकरा देते
है,
तो कभी आंसू तक पी जाते
है..‼
"बैठना भाइयों के बीच,
चाहे "बैर" ही क्यों ना
हो..💞
और खाना माँ के हाथो
का,
चाहे "ज़हर" ही क्यों ना
हो..‼...
अगर आप अपनी माँ को
बेहद प्यार करते है तो ये
मैसज को इतना फैलाओ
जितना तुम अपनी माॅ को
चाहतें

I love mom so love you
ab aapki marji

Monday, 4 March 2019

कश्मीर में देशद्रोहियों के खाते सील

*कश्मीर मे जमात-ए-ईस्लाम के 70 खाते सील*
*52 करोड रुपए फ्रिज किए*
*1000 मदरसे पर जांच*


*👉जम्मू-कश्मीर में जमात-ए-इस्लामी (JeI) पर कार्रवाई जारी है क्योंकि इस सप्ताह के शुरू में श्रीनगर से अलगाववादी संगठन के शीर्ष नेतृत्व को गिरफ्तार किए जाने के बाद किश्तवाड़ से तीन और गिरफ्तारियां हुई थीं।*

👉संगठन से जुड़े 70 से अधिक बैंक खातों को सील कर दिया गया और कई अन्य केवल श्रीनगर में सरकार के नियंत्रण में हैं। सरकार ने जमात से संबंधित 52 करोड़ रुपये की विभिन्न नकदी निधियों को भी फ्रीज कर दिया। अलगाववादी संगठन के 200 नेताओं और कैडर को सप्ताह में बाद में अनुच्छेद 35 ए की सुनवाई से पहले निवारक हिरासत में ले लिया गया था। सरकार ने संगठन के खिलाफ यूएपीए को रोक दिया।
इस बीच, सरकार राज्य भर में लगाव के लिए JeI की संपत्तियों की पहचान करने की कोशिश कर रही है।

*केंद्र सरकार ने कहा - जमाते ए इस्लामी के तार जुड़े हुए हैं आतंकी संगठनों से , और अलगाववादी गतिविधियों को आगे बढ़ा रहे हैं*

👉जमात ए इस्लामी पर प्रतिंबंद और कार्यवाही से *तिलमिलाई मेहबूबा मुफ्ती ने शनिवार को केंद्र द्वारा जमात-ए-इस्लामी (जेआईआई) पर प्रतिबंध को "प्रतिशोध" का कार्य करार दिया, कहा कि इसके "खतरनाक परिणाम" होंगे।* "आपके पास देश में शिवसेना, जनसंघ, ​​आरएसएस है, जिन्होंने एक प्रकार का मांस खाने के आधार पर लोगों को चूना लगाया है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई है। हालांकि, गरीब और चल रहे स्कूलों की मदद करने वाले एक संगठन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसके कार्यकर्ताओं ने जेलों में डाल दिया। हम इसकी अनुमति नहीं देंगे। इसके परिणाम खतरनाक होंगे

*ऐसे और भी अनेकों इस्लामिक संगठन और संसथान हैं जो आतंक फ़ैलाने में लगे हुए हैं -फिर भी लोगों को आतंकवाद का धर्म पता नहीं चलता , लेकिन अब एक एक को उधेड़ा जाएगा इसीलिए विपक्ष से लकर पाकिस्तान तक मोदी सरकार को उखाड़  फेंकना चाहती है ...*

*आतंकवाद को समाप्त करने के लिए उनकी जड़ें काटनी पड़ेगी । वही मोदीजी कर रहे हैं ।*
*नमो नमो* 

Sunday, 3 March 2019

पकिस्तान द्वारा भारत पर हमले के बारे में स्वीडन की एक न्यूज़ मैगज़ीन ने लिखा

_स्वीडन की एक न्यूज़ मैगज़ीन ने लिखा है -
F16 के जमीदोज होते ही अमेरिका को पता चल गया था, भारत पर इसके इस्तेमाल से_ _अमरीका गुस्से में था पर उस समय ये भी जरुरी पाक की भारत के गुस्से से बचाना भी था। क्योकिं भारत का एक पायलट पाक_ _कब्जे में जाते ही भारत बड़ी कार्यवाई के लिये ब्रम्होस मिसाइलें तैयार कर ली थी। प्लान यही था कि पाकिस्तान एयर फोर्स को रात में ही तहस नहस कर दिया जाये। जिसकी भनक अमेरिका को लग गयी। अमेरिका ने तुरन्त_ _पाकिस्तान को चेता दिया कि कब्जे में रखे भारत के पायलट को कोई नुक्सान नहीं होना चाहिये, नहीं तो भारत को रोकना नामुमकिन होगा, और चेताया कि युद्घ की स्थिति में वो_ _F16 के इंजन को लॉक कर देगा। भारत की सम्भावित कठोर कार्यवाई से घबराये खुद बाजवा ने UAE से बात की ,और उधर_ _अमेरिका ने अरब और रूस से बात की। अरब ने भारत से एक रात रुकने की सलाह दी। अरब ने करीब दोपहर में ही pmo नयी दिल्ली से सम्पर्क साध लिया था और पाक को फटकार लगायी। रूस, अमेरिका ने पाक को समझा दिया की कल सुबह तक हर हाल में इंडियन पायलट को छोड़ने की घोषणा करे, वो भी बिना शर्त। यही नहीं, पाक ने चीन से भारत के आसमान पर निगरानी कर रहे उपग्रह से डायरेक्ट लिंक मांगा, जिसे चीन ने मना कर दिया। अन्त में पाक ने टर्की से मदद मांगी। उसने फ़ौरन ही मना कर दिया और पायलट को छोडने को कहा। इधर भारत क्या कर सकता है, इसकी जानकारी के लिये पूरे विश्व के बड़े देशो के उपग्रह भारत पर नजर रख रहे थे। 24 फरवरी से लेकर 28 फरवरी तक रात में, पाकिस्तान के बड़े फौजी_ _अधिकारी घर में बने बन्करों में रहते थे। पाक बिलकुल असहाय था, मोदी जी ने लाचार बना दिया था।_

_और हमारे यहाँ कुछ भड़वे इमरान खान के मुरीद हुए जा रहे।_

How the US stacks up

 Debate about how to keep up with countries that perform best on international tests has been percolating for years in the United States. Now there’s a new comparison to consider – one that ranks 21 countries on the status of teachers, a factor that experts say can influence the effectiveness of education.
The index is based on surveys comparing teaching to other professions and how much respect the public says teachers get from students. The report also includes the context of teacher pay, the degree to which parents encourage children to become teachers, and public opinion on pay-for-performance policies. The Varkey Gems Foundation, a London-based nonprofit devoted to improving education for disadvantaged students, released the index Wednesday evening.
In China, about one-third of those surveyed said teachers could be compared with doctors. In two-thirds of the countries (including top-performers in student testing such as Singapore, South Korea, and Finland), the profession was most often compared with social work. In the US (along with Brazil, France, and Turkey), the most common comparison was to librarians.

VIP Culture Thrills In India So Much That We Have More VIPs Than Any Other Country

Janta Hai Mera Baap Kaun Hai...Indians have more reasons to listen to this than any other people in the world.  Baade Baap Ki Aaulad... is the unsaid meaning of this lexicon which in some way or the other has made us feel that we, the normal Indians are second class citizens.
businessmen, sports personalities - the VIP culture that exists in our country has become a rogue and guess what, it’s rising like never before. In fact India has the highest number of VIPs in the world, who preferably get everything ahead of the normal Indians and that too with the money we pay as tax.
India’s lists of people with VIP status has crossed 450 and mind it, these are only those people who have VIP security apparatus to safeguard them. Since the  status of being a VIP is deeply coveted in Indian system, the actual number of so called VIPs in India is much higher
In 2015 Indian government mulled to prepare a list of VIPs, so that they get easy immigration at US airports, and initially government thought of keeping 2,000 odd names in the list which could go up to 15,000 in years to come. Nevertheless, the list is expected to swell,
Meanwhile, in other countries, this isn’t the case. Population of 1.3 billion people is one excuse that we get to hear whenever the subject of large number of VIPs arises in India, China is more populated than our country yet have lesser number of designated VIPs.And this amount is their saving as they don’t have to pay any tax on their salaries apart from all the freebees they get as allowances. A MPs doesn’t even buys a needle for himself from his own pocket and it’s the government which takes cares of the all expenses from the tax they we pay.

प्रशासक समिती

*एक बार पूरा पढ़िए अगर💪56"सीने के अहसास न हुआ तो बोलना*

*👉"पायलट अभिनंदन वर्तमान को छोड़ने के पाकिस्तान के फैसले के पीछे की पूरी कहानी सामने आ रही है।*
➡ जानकारी के मुताबिक इमरान खान के इस फैसले के पीछे *जिनेवा संधि नहीं, बल्कि भारत के हमले का अल्टीमेटम था।*

➡सरकारी सूत्रों ने बताया कि पायलट के पाकिस्तान के कब्जे में होने की खबर के बाद पीएम नरेंद्र मोदी बेहद नाराज थे और उन्होंने इसकी जवाबी कार्रवाई जल्द से जल्द करने का मन बना लिया था। *इस दौरान भारत ने अमेरिका समेत कई देशों को यह साफ कर दिया कि अगर पाकिस्तान ने 24 घंटे के अंदर विंग कमांडर अभिनंदन को वापस नहीं लौटाया तो भारत पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए स्वतंत्र होगा।*

➡अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कूटनीतिक जरियों से इस बात की जानकारी पाकिस्तानी सरकार को दी और कहा कि अगर वो गुरुवार शाम तक अभिनंदन को वापस करने का एलान नहीं करता है तो उसके बाद के घटनाक्रम की अमेरिका की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी।
➡खास बात यह रही कि चीन और सऊदी अरब के विदेश विभागों ने भी पाकिस्तान सरकार से साफ कर दिया कि पहले वो भारतीय पायलट को रिहा करे, वरना हालात हाथ से निकल सकते हैं।
*➡गुरुवार रात तय था भारत का हमला*

👉सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक भारतीय सेना ने बुद्धवार और गुरूवार की रात को पाकिस्तान के खिलाफ सभी मोर्चों पर एक साथ जंग छेड़ने का फैसला कर लिया था। इनमें मिसाइलों से हमले की भी तैयारी थी।

➡पाकिस्तानी सेना और सरकार को जब इस बात की भनक लगी तो बुधवार की रात भर उनकी सांसें अटकी रहीं। पाकिस्तान को यह लगता रहा कि कहीं भारत बुधवार को ही हमला न कर दे। इस डर का इशारा इमरान खान ने पाकिस्तानी संसद में दिए अपने भाषण में भी किया है।

➡इमरान ने पाकिस्तानी संसद को संबोधित करते हुए कहा कि *‘हमें डर था कि भारत कहीं मिसाइल हमला ना कर दे इसलिए पूरा देश अलर्ट पर रखा गया था। हवाई सेवाएं रोक दी थी और सेना को किसी भी कार्रवाई के लिए तैयार रहने कहा था।’* बुधवार की रात बीतने पर पूरे पाकिस्तान ने चैन की सांस ली।

➡सुबह से ही इमरान खान और सेना के बड़े अफसरों की बैठकों का दौर शुरू हो चुका था। इस दौरान अमेरिकी विदेश विभाग ने एक बार फिर से दोपहर 12 बजे के आसपास पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी को फोन करके याद दिलाया कि समय बीता जा रहा है।

*👉सौदेबाजी की कोशिश में था पाकिस्तान*
➡भारतीय विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान ने पायलट अभिनंदन के बदले सौदेबाजी की कोशिश भी शुरू कर दी थी। इसी के तहत पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने वहां के टीवी चैनल जियो न्यूज़ को फोन पर इंटरव्यू में कहा कि अगर भारतीय सेनाएं पीछे हट जाएं तो वो अभिनंदन को छोड़ने को तैयार हैं।
➡लेकिन विदेश विभाग ने इस पेशकश का जवाब यह दिया कि ‘पाकिस्तान से कोई सौदेबाजी नहीं होगी और *अगर उसने विंग कमांडर अभिनंदन को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की तो उसकी खैर नहीं।’*

➡गुरुवार दोपहर 2 बजे के आसपास भारतीय टीवी चैनलों पर विदेश मंत्रालय के ऐसे सख्त तेवरों की खबर आने के बाद पाकिस्तान समझ गया कि सौदेबाजी की कोशिशें उसे महंगी पड़ सकती हैं। पाकिस्तानी सेना से हरी-झंडी मिलने के बाद इमरान खान ने आनन-फानन में संसद में रिहाई का एलान करने का फैसला किया।

*➡इस ऐलान से पहले अमेरिकी सरकार और इस्लामाबाद में भारतीय राजदूत को फोन पर यह जानकारी दे दी गई थी कि रिहाई का थोड़ी देर में ऐलान होने वाला है।* अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप इस वक्त वियतनाम के हनोई में उत्तर कोरिया के किम जोंग उन से मिलने के बाद मीडिया को संबोधित कर रहे थे। *उन्होंने वहां पर मीडिया को यह जानकारी दी कि थोड़ी देर में कुछ अच्छा होने वाला है।* उनका इशारा इसी बात की तरफ था।

*👉आतंक से लड़ाई में अब आगे क्या होगा?*
➡हमारे सूत्र ने बताया कि भारत ने पूरे विश्व समुदाय को जता दिया है कि पाकिस्तान में आतंकी नेटवर्क के सफाये के बिना वो अब चुप नहीं बैठेगा। *भारत ने कहा है कि या तो पाकिस्तान खुद इन ठिकानों को खत्म करे या भारत को यह काम करना पड़ेगा।*

➡💪साफ है कि भारत ने जता दिया है कि वो आगे फिर से पाकिस्तान के अंदर हमले करेगा। इस बात की भी जानकारी भी अमेरिका से लेकर चीन और सऊदी अरब जैसे पाकिस्तान के हितैषी देशों को दे दी गई है।
*➡भारत सरकार ने यह शर्त भी रखी है कि पाकिस्तान हाफिज सईद और जैश ए मोहम्मद जैसे आतंकवादियों को उसे सौंपे।*

➡पूरी दुनिया इस बात को समझ रही है कि भारत इस मामले में अब झुकने को तैयार नहीं है। ऐसे में आगे भी पाकिस्तान को ही झुकना होगा, जिसकी शुरुआत इमरान खान ने कर दी है।


अभिनंदन की वापसी

अभिनंदन की वापसी की प्रार्थना मैंने भी की... और अभिनंदन के लौटने की खुशी मुझे भी हुई... लेकिन अभिनंदन को लेकर जैसी अतिशयता भरी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है वह हम लोगों का ट्रेडमार्क है। भारतीय जनता अतिशयता के दो किनारों पर जीती है -- अतिशय नफ़रत या अतिशय प्यार।

अभिनंदन वापस आ गए हैं -- उनके लिए तमाम तरह से ख़ुशी का इज़हार भी हो चुका है -- लेकिन इस शोरगुल के बीच स्काड्रन लीडर सिद्धार्थ वशिष्ठ के लिए बहुत कम लोगों ने शोक जताया। जो बचकर आ गया उसके लिए पेंटिंग बन रही हैं, कविताएँ लिखी जा रही हैं, ट्वीट्स हो रहे हैं, टनों स्याही से खबरें छप रही हैं, करोड़ों मैन-हॉवर टीवी निहारने में खर्च हो रहे हैं... लेकिन जो शहीद हो गया उसके लिए तो...

भावनात्मक अतिशयता की यही लहरें हमसे हमारा विवेक छीन लेती हैं... मीडिया हमें जो सेलेब्रेट करने को कहता है हम उसे सेलेब्रेट करते हैं... मीडिया जिससे नफ़रत करने को कहता है हम उससे नफ़रत करने लगते हैं। हमें लगता है कि हम अपने मन से कुछ कर रहे हैं लेकिन यदि आप ठंडे दिमाग़ से सोचें तो हमारे सारे विचार और कार्य मीडिया नियंत्रित हैं (इसमें सोशल मीडिया भी शामिल है)... हम पढ़-सुन कर भावना की लहरों में हिल्लोर खाते रहते हैं और समझते रहते हैं कि नाव पर हमारा ही नियंत्रण है।

सिद्धार्थ वशिष्ठ और पुलवामा के बाद शहीद हुए अन्य सिपाहियों की आत्माएँ भी स्वर्ग से अभिनंदन का अभिषेक और स्वयं को लगभग भुला दिए जाने का तमाशा देख रही होंगी।

जवाब हमें ही देना होगा कि कुछ दिन पहले तक शहादत की महानता का राग अलापने वाले करोड़ों "देशभक्त" लोग कैसे अचानक आई एक लहर में शहादत और शहीदों को भूल जाते हैं।

जवाब हमें ही देना होगा कि कैसे पुलवामा में शहीद हुए जवान की पत्नी को खुलेआम कुलक्षिणी, देशद्रोही और अपने पति की हत्यारी कहा गया क्योंकि उन्होनें "I don't want war" शब्द कह दिए थे।

जवाब हमें ही देना होगा कि कैसे हमारा समाज पुलवामा में शहीद हुए एक अन्य जवान की पत्नी को मात्र आठ दिन के बाद अपने देवर से ब्याह करने के लिए मजबूर कर रहा है।

मेरे देशवासियों... अतिशयता से बचें... कृपया अतिशयता से बचें... यह एक रोग है जो आपकी नसों में मीडिया द्वारा उतारा जा रहा है... कृपया अतिशयता से बचें

3मार्च की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ


3 मार्च 1575 - मुग़ल बादशाह अकबर ने तुकारोई की लड़ाई में बंगाली सेना को हरा था।
3मार्च 1707 – छठे मुगल बादशाह औरंगजेब का निधन हुआ और बहादुरशाह प्रथम ने गद्दी संभाली।
3मार्च 1923 – टाइम पत्रिका का पहला प्रकाशन हुआ।
3मार्च 1939 - महात्मा गाँधी, भारत के मुंबई शहर में निरंकुश शासन के विरोध में तेज़ी लाये।
3 मार्च 1971 – भारत-पाक युद्ध प्रारम्भ हुआ और भारत की बांग्लादेश मुक्ति बाहिनी की खुले समर्थन की घोषणा हुई।
3 मार्च 1974 – तुर्की एयरलाइंस का डीसी10 विमान पेरिस के निकट दुर्घटनाग्रस्त हो गया जिसकी वजह से विमान में सवार सभी 345 लोगों की मौत हो गई।
3 मार्च 1980 – पियरे त्रिदियू ने दूसरी बार कनाडा के प्रधानमंत्री के रुप में शपथ ली।
3 मार्च 1992 – बोस्निया हेर्ज़ेगोविना एक जनमत संग्रह के बाद योगोस्लाविया से अलग हो गया।
3 मार्च 1992 – तुर्की के कोयला खदान में गैस विस्फोट में 263 मारे गए।
3मार्च 1999 - अब्दुल रहमान अरब मूल के ऐसे प्रथम व्यक्ति बने जिन्हें इस्रायली सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश बनाया गया।
3 मार्च 2000 - अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरण द्वारा क्रोएशिया के जनरल तिहोमिर ब्लास्किय को 45 साल क़ैद की सज़ा।
3 मार्च 2005 - यूक्रेन के राष्ट्रपति विक्टर यूशचेंकों की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय रक्षा परिषद ने इराक से अपने सैनिक वापस बुलाने का निर्णय लिया।
3 मार्च 2006 - फिलीपींस में आपातकाल हटा।

3 मार्च 2007 - पाकिस्तान ने हत्फ़-2 अब्दाली बेलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया।
3 मार्च 2008 - मेघालय में नई विधानसभा के लिए चुनाव में 75% मतदान हुआ।
3 मार्च 2008 - कन्या भ्रूण हत्या रोकने के केन्द्र सरकार ने धन लक्ष्मी नामक नई योजना शुरू की।
3 मार्च 2008 - दक्षिणी अफ़ग़ानिस्तान में नाटो व अफ़ग़ान सुरक्षा बलों के अभियान में 22 आतंकी मारे गए।
3 मार्च 2009 – पाकिस्तान के लाहौर में मैच खेलने जा रही श्रीलंकाई क्रिकेट टीम की बस पर हथियारबंद लोगों ने गोलियां चला दीं।
3 मार्च 2009 - स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया ने स्मार्ट यूनिट योजना को लांच किया।
3 मार्च 2012 – पोलैंड में दो ट्रेनों की टक्कर में 16 लोगों की मौत हुई और 50 लोग घायल हुए।
3 मार्च 2013 – पाकिस्तान के कराची में बम विस्फोट से 45 की मौत हुई।
3 मार्च 2013 – संयुक्त राष्ट्र ने 3 मार्च को वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ डे के रूप में मनाए जाने की घोषणा की।



3 1839 – टाटा समूह के संस्थापक जमशेदजी टाटा का जन्म हुआ।
1847 – टेलीफोन का आविष्‍कार करने वाले अलेक्‍जेंडर ग्राहम बेल का जन्‍म हुआ।
1880 - अचंत लक्ष्मीपति - आयुर्वेदिक औषधियों के प्रचार-प्रसार के लिए प्रसिद्ध थे।
1902 - रामकृष्ण खत्री - भारत के प्रमुख क्रांतिकारियों में से एक थे।
1926 - रवि (संगीतकार) - हिन्दी फ़िल्मों में प्रसिद्ध संगीतकार थे।
1955 - जसपाल भट्टी, प्रसिद्ध हास्य अभिनेता।
1976 - राइफ़लमैन संजय कुमार, परमवीर चक्र से सम्मानित भारतीय सैनिक।

*3 मार्च को हुए निधन👉*

1707- औरंगजेब, भारत के मुग़ल बादशाह।
1900 – कोटलेब डाइमलर नामक जर्मन वैज्ञानिक का 64 वर्ष की आयु में निधन हुआ।
1919 - हरि नारायण आपटे - प्रसिद्ध मराठी भाषी उपन्यासकार, नाटककार तथा कवि।
1982 – उर्दू साहित्‍य के लिए पहला ज्ञानपीठ पुरस्‍कार पाने वाले शायर फिराक गोरखपुरी का निधन हुआ।
2002- जी.एम.सी. बालायोगी, प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ, पूर्व लोकसभा अध्यक्ष।
2009 - यादवेन्द्र शर्मा 'चन्द्र' - राजस्थान के सर्वाधिक चर्चित व प्रसिद्ध उपन्यासकार, कहानीकार तथा नाटककार।
2015 - डॉ. राष्ट्रबंधु, बाल साहित्य के प्रसिद्ध साहित्यकार।

*3 मार्च के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव👉*

🔅 _श्री मुनीसुव्रत नाथ जी मोक्ष (जैन) ।_
🔅 _राइफलमैन श्री संजय कुमार जयन्ती ( परमवीर चक्र से सम्मानित) ।_
🔅 _विश्व वन्य जीव दिवस।_

*कृपया ध्यान दें जी👉*
    *यद्यपि इसे तैयार करने में पूरी सावधानी रखने की कौशिश रही है। फिर भी किसी घटना , तिथि या अन्य त्रुटि के लिए मेरी कोई जिम्मेदारी नहीं है ।*

🌻आपका दिन *_मंगलमय_*  हो जी ।🌻
          सुरजीत चौधरी
               डेगाना
   ⚜⚜ 🌴 💎 🌴⚜⚜

Saturday, 2 March 2019

सामान्य ज्ञान करेंट अफेयर्स 01 मार्च


*🔷1. सम्प्रीती 2019 संयुक्त सैन्य अभ्यास का आयोजन किन दो देशों के बीच किया जायेगा?*
*♦उत्तर – भारत और बांग्लादेश*
⚜भारत और बांग्लादेश के बीच 2 से 15 मार्च, 2019 के बीच “सम्प्रीती” युद्ध अभ्यास का आयोजन किया जायेगा। यह युद्ध अभ्यास भारत और बांग्लादेश के बीच रक्षा सहयोग का हिस्सा है। द्विपक्षीय रक्षा सहयोग की दृष्टि से यह अभ्यास काफी महत्वपूर्ण है। इसका आयोजन बांग्लादेश के तंगेल में किया जायेगा। गौरतलब है कि यह दोनों देशों के बीच सैन्य अभ्यास का आठवां संस्करण है।

*🔷2. नाइजीरिया का नया राष्ट्रपति किसे चुना गया?*
*♦उत्तर – मुहम्मदु बुहारी*
⚜मुहम्मदु बुहारी को पुनः नाइजीरिया का राष्ट्रपति चुना गया, उनका कार्यकाल चार वर्ष का होगा। राष्ट्रपति चुनाव में मुहम्मदु बुहारी ने पूर्व उपराष्ट्रपति अतिकु अबूबकर को पराजित किया। उन्होंने 4 मिलियन वोट से अपने मुख्य प्रतिद्वंदी को पराजित किया। मुहम्मदु बुहारी आल प्रोग्रेसिव कांग्रेस पार्टी के सदस्य हैं।

*🔷3. हाल ही में किस राज्य सरकार ने प्रणाम आयोग की स्थापना की?*
*♦उत्तर – असम सरकार*
⚜असम के मुख्यमंत्री सर्बनंद सोनोवाल ने हाल ही में प्रणाम आयोग की घोषणा की, यह घोषणा प्रणाम (Parents Responsibility and norms for Accountability and Monitoring) बिल के तहत की गयी है। असम सरकार इस योजना को निजी कर्मचारियों तथा केंद्र सरकार के कर्मचारियों पर भी लागू करने पर विचार कर रही है।
इस बिल का उद्देश्य सरकार द्वारा वृद्ध माता-पिता तथा दिव्यांग भाई-बहनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है तथा उन्हें वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है। यह देश में इस प्रकार का पहला बिल है।

*🔷4. अंतर्राष्ट्रीय टी-20 क्रिकेट में चार गेंदों में चार विकेट लेने वाला पहला गेंदबाज़ कौन बना?*
*♦उत्तर – रशीद खान*
⚜अफ़ग़ानिस्तान के लेग स्पिनर रशीद खंड ने आयरलैंड के विरुद्ध लगातार चार गेंदों पर चार विकेट लिए, वे टी-20 क्रिकेट में ऐसा कारनामा करने वाले पहले गेंदबाज़ बने। वे अंतर्राष्ट्रीय टी-20 क्रिकेट में हैट्रिक लेने वाले सातवें गेंदबाज़ हैं।

*🔷5. हाल ही में किस राज्य ने बंदरों को वर्मिन घोषित किया?*
*♦उत्तर –हिमाचल प्रदेश*
⚜हिमाचल प्रदेश सरकार ने हाल ही में बंदरों को वर्मिन घोषित किया। यह घोषणा 11 जिलों की 91 तहसीलों व उप-तहसीलों के लिए की गयी है। इसका मुख्य कारण बंदरों द्वारा फसलों व लोगों को नुकसान पहुँचाना है। वर्मिन घोषित किये जानेके बाद बड़े स्तर पर बंदरों का शिकार किया जा सकता है।

*🔷6. राष्ट्रीय युवा संसद उत्सव में प्रथम स्थान किसने प्राप्त किया?*
*♦उत्तर – श्वेता उम्रे (महाराष्ट्र)*
⚜हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रीय युवा संसद उत्सव के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किये। इस राष्ट्रीय स्तरीय प्रतियोगिता में महाराष्ट्र की श्वेता उम्रे पहले स्थान पर रहीं। जबकि कर्नाटक की अन्जनाक्षी एम. एस. दूसरे स्थान तथा बिहार की ममता कुमारी तीसरे स्थान पर रहीं। इस उत्सव का आयोजन राष्ट्रीय सेवा योजना तथा नेहरु युवा केंद्र संगठन के साथ मिलकर किया गया।

*🔷7. हाल ही में सुर्ख़ियों में रहा तितानवाला म्यूजियम किस राज्य में स्थित है?*
*♦उत्तर – राजस्थान*
⚜हाल ही में केन्द्रीय कपड़ा उद्योग मंत्री स्मृति ईरानी ने राजस्थान के बगरू में तितानवाला म्यूजियम का उद्घाटन किया। इस संग्रहालय में छिपा समुदाय की हैण्ड-ब्लाक प्रिंटिंग का प्रदर्शन किया गया है। बगरू हैण्ड ब्लाक प्रिंटिंग राजस्थान के दूरस्थ स्थानों में छिपा समुदाय द्वारा प्राकृतिक रंगों से चित्रण की कला है।

*🔷8. विश्व सामाजिक न्याय दिवस 2019 की थीम किया है?*
*♦उत्तर – यदि आप शान्ति चाहते हैं तो सामाजिक न्याय के लिए कार्य कीजिये*
⚜20 फरवरी को विश्व सामाजिक न्याय दिवस के रूप में मनाया जाता है, इसका उद्देश्य निर्धनता, बेरोज़गारी तथा परित्याग की समस्या का सामना करना है। इस वर्ष विश्व सामाजिक न्याय की थीम “यदि आप शान्ति चाहते हैं तो सामाजिक न्याय के लिए कार्य कीजिये” है। सामाजिक न्याय के लिए लैंगिक समानता, सामाजिक सुरक्षा तथा प्रवासियों के अधिकारों की सुरक्षा की जानी आवश्यक है। सामाजिक न्याय तभी सुनिश्चित हो सकता है जब लोगों को लिंग, आयु, नस्ल, धर्म अथवा संस्कृति के कारण समस्याओं का सामना न करना पड़े। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 26 नवम्बर, 2007 को 20 फरवरी को प्रतिवर्ष विश्व सामाजिक न्याय दिवस के रूप में मनाये जाने को मंज़ूरी दी। पहली बार 2009 में विश्व सामाजिक न्याय दिवस मनाया गया।

*🔷9. किस कंपनी ने 4G/LTE तथा 5G NR मॉडेम के लिए भारत के पहले स्वदेशी सेमीकंडक्टर चिप का निर्माण किया?*
*♦उत्तर – सिग्नल चिप*


*🔷10. किस देश ने टी-20 क्रिकेट में उच्चतम स्कोर बनाया?*
*♦उत्तर –अफ़ग़ानिस्तान*


      सुरजीत चौधरी 

शैक्षिक समाचार

*12वीं बोर्ड की परीक्षा 7 से*🌹👇
माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर की 12वीं कक्षा की परीक्षा सात मार्च से शुरू होगी। पंजीकृत 28,282 अभ्यर्थियों के...

 
बीकानेर | माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर की 12वीं कक्षा की परीक्षा सात मार्च से शुरू होगी। पंजीकृत 28,282 अभ्यर्थियों के लिए जिले में 174 केंद्रों पर परीक्षा करवाई जाएगी। सोमवार को महारानी स्कूल से प्रश्न-पत्र संबंधित केंद्रों के लिए रवाना किए जाएंगे। डीईओ माध्यमिक उमाशंकर किराड़ू ने इस संबंध में समस्त केंद्राधीक्षकों को निर्देश जारी किए है। डीईओ माध्यमिक किराड़ू ने बताया कि सभी केंद्राधीक्षकों को स्वयं पेपर प्राप्ति के लिए वितरण केंद्र महारानी स्कूल पहुंचना होगा। अतिरिक्त केंद्राधीक्षक, लिपिक, सहायक कर्मचारी सहित अन्य किसी भी कार्मिक को साथ नहीं लाना होगा। उन्होंने बताया कि चार मार्च को केंद्राधीक्षकों को सुबह 7.30 बजे महारानी स्कूल पहुंचना होगा। जबकि ग्रामीण क्षेत्र के केंद्राधीक्षकों जो दूरस्थ क्षेत्र के हैं उनको तीन मार्च की शाम को ही बीकानेर पहुंचना होगा। डीईओ किराड़ू ने बताया कि बोर्ड के निर्देशानुसार सूर्यास्त से पहले ही संबंधित थानों एवं केंद्रों पर प्रश्न-पत्र पहुंचाने होंगे। जिन परीक्षा केंद्रों के प्रश्न-पत्र बीकानेर शहर के थानों पर रखे जाने है वे केंद्राधीक्षक सुबह 11 बजे प्रश्न-पत्र वितरण केंद्र पर पहुंचेंगे। सहायक केंद्राधीक्षक सहित पेपर कॉर्डिनेटर संबंधित थाने व एकल केंद्र और नोडल केंद्र पर रहेंगे।

पाकिस्तान की जेल में आज भी हमारे 54 जांबाज सैनिक बंद हैं

*देश के जांबाज वीर बहादुर विंग कमांडर अभिनंदन दुश्मन देश में भी चट्टान की नाई अडिग रहे और आज स्वदेश लौट आये, उनके लिए पूरे देशभर में खुशी की लहर है और हो भी क्यों न ? हमारे पुराने मिग 21 से नए F16 को गिराकर जीत हासिल की है । जब उनको बंदी बनाया गया तो देशवासी लगातार प्रार्थना कर रहे थे और आज उनकी प्रार्थना सफल भी हुई ।*

*🚩आज हमारे देश में खुशी का महौल है पर एक दुःखद बात ये है कि 1965 और 1971 में हुए युद्ध के दौरान हमारे 54 सैनिकों को पाकिस्तान ने बंदी बना लिया था जो आजतक हमें मिल नहीं पाये ।*

*🚩1965 में 6 और 1971 में 48 युद्धबंदी तत्कालीन सरकार की घातक, शर्मनाक अनदेखी और आपराधिक लापरवाही के कारण आजतक लौटकर अपने घर वापस नहीं। उनमें भी एक विंग कमांडर हरसरन सिंह गिल थे, 4 स्क्वाड्रन लीडर समेत वायुसेना के 25 पायलट शामिल थे ।*

*उनके परिजन आज 48 साल बाद भी तत्तकालीन सरकार की प्राणघातक करतूत के कारण शोक की अग्नि में जल रहे हैं ।*

*🚩उल्लेखनीय है कि 1971 के भारत पाक युद्ध में बंदी बनाए गए 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों तथा 3800 भारतीय सैनिकों के प्राणों की कीमत चुका कर भारतीय सेना द्वारा कब्ज़ायी गई पाकिस्तानी भूमि को 1972 में बिना शर्त वापस कर दी ।*

*🚩परंतु भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर हरसरन सिंह गिल, फ्लाइट लेफ्टिनेंट वी वी तांबे और फ्लाइंग ऑफिसर सुधीर त्यागी तथा भारतीय सेना के कैप्टन गिरिराज सिंह, कैप्टन कमल बख्शी समेत उन 54 भारतीय युद्धबंदियों की रिहाई की याद तक नहीं आयी जो पाकिस्तानी जेलों में बंद थे और जिनके बंद होने के पुख्ता प्रमाण सार्वजनिक रूप से आए दिन उपलब्ध हो रहे थे ।*


*🚩उल्लेखनीय है कि फ्लाइट लेफ्टिनेंट वी. वी. तांबे का नाम 5 दिसंबर 1971 को पाकिस्तान के ऑब्जर्वर अखबार में फ्लाइट लेफ्टिनेंट तांबे के नाम से प्रकाशित हुआ था। अखबार रिपोर्ट में कहा गया था कि 5 भारतीय पायलट पाकिस्तान के कब्जे में हैं.... पर पाकिस्तान ने युद्ध बंदियों की सूची में इनको नहीं दिखाया और तत्कालीन सरकार भी उन भारतीय सैनिकों को मुक्त करवाने में नीरस थी । उल्लेखनीय है कि फ्लाइट लेफ्टिनेंट वीवी तांबे की पत्नी साधारण महिला नहीं थी । 1971 में वो अंतरराष्ट्रीय ख्याति की बैडमिंटन खिलाड़ी थीं तथा बैडमिंटन की राष्ट्रीय महिला चैम्पियन थीं । अतः उन्होंने हर उच्च स्तर तक गुहार लगाई थी लेकिन परिणाम शून्य ही रहा ।*

*🚩युद्ध की समाप्ति के 11 दिन पश्चात 27 दिसम्बर 1971 को भारतीय सेना के मेजर ऐ के घोष का पाकिस्तान की जेल में बंदी अवस्था का चित्र विश्वविख्यात अमेरिकी पत्रिका TIMES ने प्रकाशित भी किया था । पर 93000 पाकिस्तानियों को रिहा करने का समझौता करते हुए तत्कालीन सरकार को मेजर घोष याद नहीं आये ।*

*🚩आपको बात दें कि 4 मार्च 1988 को पाकिस्तान की जेल से रिहा होकर भारत आये दलजीत सिंह ने बताया था कि उसने फ्लाइट लेफ्टिनेंट वीवी तांबे को लाहौर के पूछताछ केंद्र में फरवरी 1978 में देखा था । 5 जुलाई 1988 को पाकिस्तानी कैद से रिहा होकर भारत वापस लौटे मुख्तार सिंह ने बताया था कि कैप्टन गिरिराज सिंह कोट लखपत जेल में बंद हैं । मुख्तार ने 1983 में मुल्तान जेल में कैप्टन कमल बख्शी को भी देखा था । उस समय उनके मुताबिक बख्शी मुल्तान या बहावलपुर जेल में हो सकते हैं। इसी तरह के कई और चश्मदीद लोगों की रिपोर्ट भी अलग अलग समय पर उन 54 भारतीय युद्धबंदियों के परिजनों के पास लगातार आती रही है ।*

*🚩फ्लाइंग ऑफिसर सुधीर त्यागी का विमान भी 4 दिसंबर 1971 को पेशावर में फायरिंग से गिरा दिया गया था और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था । अगले दिन पाकिस्तान रेडियो ने इस बारे में घोषणा की थी तथा पाकिस्तानी अखबारों ने भी इस खबर को छापा था । इसके बावजूद पाकिस्तान लगातार यही कहता रहा कि ये 54 लोग उसकी जेलों में बंद नहीं हैं, जबकि उनके परिजनों का मानना था कि ये लोग पाकिस्तान की जेलों में कैद हैं ।*

*अतः आज पूरा देश तत्कालीन सरकार से यह जानना चाहता है कि 1972 में पाकिस्तान से समझौता करने की जल्दबाजी में इतनी अंधी बहरी क्यों हो गयी थी

*देश में चैन की नींद आज हम उन जवानों के कारण ही ले रहे हैं इसलिए सरकार को पूर्ण प्रयास करना चाहिए कि उन 54 जवानों को शीघ्र वापिस भारत देश में लेकर आएं ।*


विंग कमांडर अभिनंदन सिंह का पकिस्तान से रिहा होने पर इमरान के बयान

1. सबसे पहले यह अच्छी तरह से समझ लें कि पाकिस्तान की राजनैतिक संरचना भारत से ठीक उलट है.
 वहाँ सबसे ऊपर सेना के सबसे ताक़तवर अधिकारियों द्वारा संचालित ऐजेंसी यानि आईएसआई, उसके नीचे सर्वशक्तिमान सेना, उन दोनों के नीचे पूरे मुल्क़ में फ़ैली दहशतगर्द तंज़ीमें और उन तंज़ीमों को वैचारिक तथा सामुदायिक सहायता देते मदरसों के आलिम और मौलाना, और इन सबसे नीचे लोकतांत्रिक ढाँचे के तीनों खंबे स्थित हैं.

इस समय वहाँ जिन इमरान ख़ान की निर्वाचित सरकार है वह इमरान ख़ान दरअसल ख़ुद में ही लोकतंत्र का फ़रेब बनाए रखने के लिए वहाँ की सर्वशक्तिमान ऐजेंसी आईएसआई तथा सेना द्वारा बैठाई गई एक आकर्षक कठपुतली भर हैं. वे जो भी कह या कर रहे हैं उसका एक-एक निर्देश आईएसआई के हेडक्वॉर्टर्स से जारी होता है. तो इमरान ख़ान को गाली या ताली कुछ भी देने से पहले समझ लें कि वह जा दरअसल कहीं और ही रही है.

2. 26 फ़रवरी की रात साढ़े तीन बजे ख़ुद ISPR (ISI का आधिकारिक प्रचार प्रकोष्ठ) के महानिदेशक मेजर जनरल आसिफ़ ग़फ़ूर ने सबसे पहले ट्वीट कर के बताया था कि हिंदुस्तान के लड़ाकू विमान LoC को अनधिकृत रूप से पार कर गए थे, और उन्होंने पाकिस्तान के अंदर ग़ैर-सैन्य ठिकानों पर बमबारी भी की.

आज उस हमले को 3 दिन हो जाने के बाद भी बारिश और कीचड़ का हवाला देकर दुनिया के किसी भी मीडिया संस्थान को अभी तक बालाकोट में घुसने नहीं दिया गया है और वहाँ पाकिस्तानी फ़ौज का सख़्त पहरा है.
 बीबीसी और रॉयटर्स की रिपोर्ट्स भी बालाकोट से कोई 4-5 मील दूर स्थित गाँवों में रहने वाले मज़दूरों से हुई बातचीत पर आधारित थीं, जिन्होंने उस रात तेज़ धमाकों की आवाज़ें सुनने की पुष्टि की.

3. अगले ही दिन, 27 फ़रवरी को इस मामले पर पाकिस्तान की संसद में बहस हुई जिसमें वहाँ सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों तरफ़ के वरिष्ठ नेताओं ने इस बात को खुल कर स्वीकार किया कि भारतीय फ़ौज के लड़ाकू विमान LoC से 80-90 किलोमीटर अंदर, ख़ैबर पख़्तूनवा तक पहुँचे थे और उन्होंने वहाँ बमबारी भी की. उस बहस के लगभग सारे वीडियोज़ इंटरनेट पर उपलब्ध हैं, आप ख़ुद देख सकते हैं.

4. अब ध्यान से सुनिए, किसी भी संप्रभु देश की सीमाओं में किसी भी देश के लड़ाकू विमानों का बिना अनुमति लिए दाख़िल होना और 80-90 किलोमीटर तक अंदर जाकर बमबारी करना ख़ुद-ब-ख़ुद 'Act Of War' अर्थात 'युद्ध की घोषणा' माना जाता है.
आपके घर में घुस कर कोई आपके मुँह पर ज़ोरदार तमाचा जड़े और आप उसे 'हवा का झोंका' बता कर खिसियानी हँसी हँस दें तब भी वह क़ानूनन हिंसात्मक आक्रमण ही रहेगा. जी हाँ , भारत ने युद्ध ही छेड़ा था पाकिस्तान के विरुद्ध.

5. भारत द्वारा पाकिस्तान पर साफ़-साफ़ युद्ध को निमंत्रण देते हुए किए गए इस खुले हमले से सबसे ज़्यादा नुकसान अगर किसी चीज़ का हुआ, तो वह पाकिस्तान की अभी तक चलती आ रही परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की धमकी के मनोवैज्ञानिक पर्दा था.

 यह धमकी देकर पाकिस्तान अब तक भारत के #SayNoToWar की तख़्ती पकड़े कबूतरदिल नागरिकों के झुंड में जो क़हर बरपा दिया करता था, इस हमले के बाद वह मनोवैज्ञानिक पर्दा हमेशा के लिए फट गया.

 भारत के विरुद्ध परमाणु युद्ध छेड़ना पाकिस्तान के लिए कैसा रूह कँपा देने वाला फ़ैसला होगा यह आप वहाँ के पूर्व सेनाध्यक्ष तथा राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ एक लंबी बातचीत में तफ़सील से बता चुके हैं,
और इस वक़्त भी वहाँ की सेना के शीर्ष पर बैठे लोग किसी मदरसे से निकले वज्रमूर्ख नहीं बल्कि अंग्रेज़ों द्वारा स्थापित मानक डिफेंस कॉलेजेज़ में पढ़े तेज़दिमाग़ प्रोफेशनली ट्रेंड आर्मी पर्सनल्स हैं.

यह धमकी सिर्फ़ एक पर्दा था जिसकी एक एक्सपायरी डेट थी. 26 फ़रवरी को वह एक्सपायरी डेट हमेशा के लिए पीछे छूट गई.

6. चूँकि भारत के विरुद्ध परमाणु युद्ध छेड़ना विकल्प नहीं था, अपने देश में अपनी ही लोकतांत्रिक सरकार की यकायक हुई इतनी बुरी फ़ज़ीहत के बाद वहाँ की फ़ौजी हुक़ूमत के सामने डैमेज कंट्रोल जो भी संभव रास्ते थे वह सरकारी प्रतिनिधियों द्वारा आनन-फ़ानन में उसी पल से आज़माए जाने लगे.

सबसे पहले 'इस्लामिक देशों के समूह' (O.I.C.) ने भारत के हमले की हल्की सी आलोचना तो की, लेकिन उससे ज़्यादा कुछ भी करने के सवाल पर टका सा जवाब दे दिया जिससे नाराज़ हो कर पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने उसके अगले कार्यक्रम में शिरकत करने से भी इनकार उसी दिन कर दिया.

7. लेकिन पाकिस्तान के हुक़्मरानों को इससे भी बड़ा झटका तब लगा, जब R.I.C. की सभा में चीन और रूस दोनों ने न सिर्फ़ भारत में आतंकी साज़िशें अंजाम देने के लिए पाकिस्तान की कड़ी आलोचना की, बल्कि उसकी सबसे बड़ी उम्मीद चीन ने भी इस मामले से पल्ला झाड़ते हुए दोनों देशों को अपने मसअले ख़ुद निपटाने के लिए कह दिया.

 सुनने में अजीब लगेगा, लेकिन इस्लामी एकता के नाम पर भी भारत के विरुद्ध पाकिस्तान का साथ देने का वायदा उसे सिर्फ़ सुदूर तुर्की से ही मिला, जिससे मिले साथ का कोई नैतिक मायना भले ही हो, उसकी कोई रणनीतिक प्रासंगिकता नगण्य ही है.

8. अब, जबकि परमाणु युद्ध की धमकी का पर्दा तार-तार हो चुका था, सीधा पारंपरिक युद्ध लड़ना कोई भी

तो किसी तरह से अपने लोगों का टूटता मनोबल बचाए रखने के लिए पाकिस्तान के फ़ौजी आक़ाओं ने LoC पार करने की बराबरी करने के लिए अपने कुछ लड़ाकू विमान भारत भेजे जो यहाँ के सैन्य ठिकानों पर हमला करने के लिए ही भेजे गए थे.
याद रखें यह भी साफ़-साफ़ 'Act Of War' ही था, जो सफल इसलिए नहीं हो पाया कि यहाँ पहले से तैयार बैठे लड़ाकू विमानों ने उनकी घेराबंदी कर के उन्हें वापस भेज दिया.

9. पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों को वापस भेजने की इसी कवायद में विंग कमांडर अभिनन्दन वर्थमान LoC पार कर गए और एक पाकिस्तानी F-16 विमान मार गिराने के बाद दुर्घटनाग्रस्त हुए अपने MiG-21 विमान से पैराशूट के ज़रिए कूद गए, और PoK में उतर कर पाकिस्तानी सेना द्वारा बन्दी बना लिए गए.

 ध्यान दें कि बन्दी बनाए जाते समय विंग कमांडर अभिनन्दन a) अपने लड़ाकू विमान समेत अनधिकृत रूप से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की सीमा में थे,

(b) पाकिस्तान के एक सैन्य विमान को मार कर नष्ट कर चुके थे, और c) वहाँ अपने किसी निजी काम से या जासूसी मिशन पर नहीं बल्कि पाकिस्तान द्वारा 'Act Of War' द्वारा छेड़े गए युद्ध पर ड्यूटी निभा रहे एक फ़ौजी अफ़सर की भूमिका में थे.

इन सारी बातों को ध्यान में रखते हुए, ऐसी कौन सी अंतर्राष्ट्रीय अदालत होगी जो विंग कमांडर अभिनन्दन वर्थमान को युद्धरत अवस्था में अपहृत एक सैनिक का दर्जा देते हुए उन्हें पाकिस्तान का 'युद्धबंदी' या 'Prisoner of War' (PoW) नहीं करेगी?

और वर्तमान समय में दुनिया भर में सभी युद्धबंदी या PoW, जेनेवा कन्वेंशन के तहत ही 7 दिनों के अंदर अनिवार्यतः छोड़े जाते हैं, जिसे न करने की दृष्टि में सीधा युद्ध अवश्यंभावी होता है.

और पाकिस्तान व दुनिया  यह अच्छी तरह से जानती भी है और मानती भी है कि भारत का वर्तमान नेतृत्व आक्रमण करने में एक मिनट की भी देरी नहीं करेगा ।
उन्हें अच्छी तरह से पता है कि भारत के पूर्व वाले नेतृत्व जिस के गुलाम पाकिस्तान आ कर पाकिस्तान से भारत के वर्तमान नेतृत्व को हटाने के लिये सहायता मांगते हैं से भारत का वर्तमान नेतृत्व सर्वथा भिन्न है।

जी हाँ, इमरान ख़ान ने भारत  के वर्तमान नेतृत्व  दबाव के चलते ही अभिनन्दन वर्थमान को छोड़ा है,

  लेकिन इतना जरूर है कि पाकिस्तान ने अपनी आतंकवाद के पोषक के रूपी हद से ज़्यादा कालिख़ पुत चुकी छवि को कुछ चमकाने की कोशिश ज़रूर की है उन्होंने इस रिहाई के बहाने.

और जिस तरह से कल तक #SayNoToWar की तख़्ती पकड़े भारत के कबूतरदिल नागरिकों के झुंड शांति के कबूतर उङा रहे हैं ,उनकी चमक का पेंट अपने चेहरे पर लगाए घूम रहे हैं, उससे लगता है कि कुछ हद तक भारत की कुछ अम्नपसंद कॉलोनियों में नोबेल शांति पुरस्कार जीतने में तो इमरान ख़ान सफल हो भी गए हैं.

 भारत की अम्नपसंद कॉलोनियों में रहने वाले #SayNoToWar की तख़्ती पकड़े कबूतरदिल नागरिकों के झुंडों द्वारा इमरान साहब को नोबेल शांति पुरस्कार मुबारक हो!

पुलवामा, बालाकोट और विंग कमांडर अभिनंदन: उड़ता पाकिस्तान

मैं आज दिन भर से टीवी के न्यूज़ चैनल बदलता रहा हूँ या फिर बार बार  फेसबुक पर जाता रहा हूँ। मैं यह इस आशा से कर रहा था कि मुझे कुछ नया सुनने, देखने या पढ़ने को मिल जाये लेकिन बेहद निराशा हाथ लगी है। मुझे कुछ भी नया नही मिला, सिवाय विंग कमांडर अभिनंदन के भारत वापसी की लेकर लगातार टीवी वालो की रिपोर्टिंग या फिर विंग कमांडर अभिनंदन के स्वागत व भारत वापसी पर प्रसन्नचित लोगो की प्रतिक्रियाओं के।

यहां मुझे यह स्वीकारने में कोई लज्जा नही है कि यह सब देख कर मुझको बेहद झुंझलाहट हो रही है। मेरी समझ मे यह नही आरहा है कि जिस घटना पर मोहर कल 4 बजकर 38 मिनिट पर पाकिस्तान की संसद में उसके प्रधानमंत्री इमरान खान द्वारा मिमियाते हुये लगा दी थी उसको भारत की मीडिया ने इतना लंबा क्यों खींच दिया है। इसमे कोई शक नही है कि अति उत्साहित होंकर अपनी भावनाओं को प्रदर्शित करना अच्छी बात है लेकिन इस चक्कर मे मूल विषय या अन्य हुई महत्वपूर्ण घटनाओं को पूरी तरह अनदेखी कर देना भी ठीक नही है। इसका कारण यह है क्योंकि भारत की पाकिस्तान द्वारा प्रयोजित आतंकवाद व अलगावाद के विरुद्ध लड़ाई की कुंजियाँ उसमे ही अंतर्निहित है।

मेरा सत्य यह है कि पाकिस्तान के राजनैतिक वर्ग व जनता की इच्छा विरुद्ध, भारत की सेना द्वारा 5 बजे शाम को होने वाली अतिमहत्वपूर्ण प्रेस ब्रीफिंग से ठीक 15 मिनिट पहले, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान द्वारा विंग कमांडर अभिनंदन को अगले ही दिन भारत वापिस भेजे जाने की घोषणा से, अभिनंदन का अध्याय समाप्त हो गया था। उसके बाद जो कुछ भी हुआ वह सब पाकिस्तान द्वारा विश्व का ध्यान उसके यहां भारत द्वारा किये गए आतंकी कैम्पो पर किये गए हमले की शर्मिंदगी को छुपाने व जैश ए मोहम्मद के प्रमुख अजहर मसूद से हटाने के प्रयास का ही प्रतिफल है।

पाकिस्तान द्वारा भारतीय महाद्वीप के लोगो के भवनात्मक पक्ष की अतिरेकता का पर्याप्त दोहन करने के लिए, भारत स्थित उसके द्वारा अनुग्रहित किये गए राजनैतिज्ञों व मीडिया वालों के माध्यम से, उसके शांति के नरेटिव व विश्व मे इमरान खान को शांति का दूत के रूप में प्रतिस्थापित करने के लिए अथक परिश्रम किया जारहा है। इसी लिए विंग कमांडर अभिनंदन को भारत को सुपर्द करने में जो कुछ भी नाटकीयता पाकिस्तान की तरफ से हुई है, वो पूरी तरह भारत मे पाकिस्तानी समर्थक वर्ग के समर्थन से किया गया है।

पाकिस्तान का विंग कमांडर अभिनंदन को भारत वापिस किये जाने का निर्णय, डर में लिया गया निर्णय है। उसके द्वारा भारत की सीमा में अपने F 16 द्वारा घुस कर सैन्य ठिकानों पर आक्रमण करने के प्रयास को विश्व से कोई भी समर्थन न मिल पाना, उसके डर का सबसे बड़ा कारण बना है। पाकिस्तान को यह एक अप्रत्याषित कटु सत्य स्वीकार करना पड़ा है कि विश्व ने भारत द्वारा पाकिस्तान के अंदर युद्धक विमानों द्वारा किया गया हमला, पाकिस्तान के विरुद्ध न मानकर आतंकवादियों के विरुद्ध माना है। इसलिये विश्व के लिए, पाकिस्तान का भारत की जगह, भारत के विरुद्ध आक्रमणकर्ता के रूप में स्थापित हो जाना उसके लिए बुरी खबर थी।

अब यहां समझने की बात यह है कि अंतराष्ट्रीय कूटनीति में, राष्ट्राध्यक्षों के बीच हुई बाते कभी भी सार्वजनिक नही होती है लेकिन उनके मुहँ से निकले वाक्यों के निहतार्थों की विवेचना करने से या फिर उनके बॉडी लैंग्वेज से उसको समझा जरूर जाता है। वे कोई सार्वजनिक कोई संदेश देते है तब भी उनकी भावभंगिमा व उद्बोधन में प्रयोग किये गए शब्दो को निचोड़ कर समझा जाता है।

जब इमरान खान ने पुलवामा की घटना के बाद, टीवी पर भारत को सम्बोधित किया था, यदि उसकी विवेचना करे तो वह उस तरह बात कर रहा था जैसे थानेदार के समाने बैठा एक हिस्ट्रीशीटर अपने को बेगुनाह सिद्ध करने के लिए दलील दे रहा है। उस वक्त यह दिख रहा था कि इमरान की टांगे कांप रही थी। इस घटना के बाद भारत के प्रधानमंत्री मोदी जी द्वारा गंभीरता से सर्वजिनिक रूप से कम से कम तीन बार जब यह कहा कि पुलवामा की घटना करके, करने वाले ने बहुत बड़ी गलती कर दी है, तब यह संवाद, सिर्फ पाकिस्तान व आतंकवादियों के लिए नही बल्कि उन सबके लिए था, जो या तो पाकिस्तान के साथ खड़ा थे या फिर वे जो भविष्य में भारत पर किसी तरह का दबाव बना सकते थे।

इसी का परिणाम था कि अजहर मसूद को वांछित आतंकवादी घोषित कराए जाने के प्रयासों को रोकने वाला चीन, यूनाइटेड नेशन में जैश ए मोहम्मद को आतंकवादी संघठन घोषित किये जाने का सहभागी बना। पाकिस्तान को उससे ही समझ लेना चाहिए था लेकिन उसके बाद जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा यह कहा गया कि भारत कुछ बड़ा कर सकता है, वह तब भी उससे नही सिख पाया। पाकिस्तान का आंकलन यही था कि यह सब बातें स्थिति को सामान्य करने के लिए कही जारही है, लेकिन वह बुरी तरह चूक गया।

बाद में जब भारत द्वारा बालाकोट में स्थित जैश ए मोहम्मद के कैम्प को 1000 किलो के बमो से उड़ाये जाने के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने अपनी सेना के साथ आपात बैठक ली थी तब उसके वीडियो यही बताते है कि चमड़े की जैकेट और लाल मफलर पहने इमरान और बिना चमकती वर्दी के उसके सेना के अधिकारियों को कुछ नही पता था कि उनके साथ हुआ क्या है। ये सब सन्निपात के बराती दिख रहे थे।

इसके बाद पाकिस्तान ने किस प्रकार प्रतिक्रिया दी? पाकिस्तान में तब से अभी तक ब्लैकआउट का पालन होता है, उनके विश्विद्यालय बन्द कर दिए गए है और पूरे पाकिस्तान में वायुयान से यात्रा रोक दी गयी है, सऊदी के 3 बोइंग विमान से महत्वपूर्ण समान( यह आंकलन है कि न्यूक्लियर बम संबंघित है) सऊदी अरब भेज दिए जाते है और भारत मे इसके विपरीत सामान्य दिन चर्या चल रही है और भारत के प्रधानमंत्री मोदी जी अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रमो को कर रहे है।

अब इस सबके अंत मे जो समझने वाली बात है और जो मेरा आंकलन है कि पाकिस्तान स्थित व समर्थित जैश ए मोहम्मद द्वारा 14 फरवरी को पुलवामा में एक आत्मघाती हमले में भारत के 44 जवानों की हत्या के बाद, भारत ने जो पटकथा लिखी थी उसमे विंग कमांडर अभिनंदन का एपिसोड एक अप्रत्याशित घटना थी। यह एक ऐसी घटना थी जिसको लेकर कोई भी वैकल्पिक योजना किसी भी युद्धक पटकथा में नही होती है। इस तरह की घटनाओं को पटकथा के अनुकूल बनाना, राजनैतिक नेतृत्व के हाथ होता है, जिसका निर्वाह मोदी जी ने बड़ी कुशलता से किया है।

उन्होंने विंग कमांडर की भारत वापसी के लिए जेनेवा कन्वेंशन को हथियार बनाया और सऊदी अरब, चीन, रूस व अमेरिका के द्वारा, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को स्पष्ट रूप से संदेश भिजवा दिया कि विंग कमांडर अभिनंदन की तुरन्त भारत वापसी के अलावा अभी कोई बात सुननी ही नही है। अब तो यह सर्वजिनिक हो चुका है कि इमरान खान ने दो बार मोदी जी से बात करनी चाही थी लेकिन मोदी जी ने बात करने से इनकार कर दिया था। यही नही सऊदी अरब के दूत से यह भी कहलवा दिया था कि यदि 5 बजे तक पाकिस्तान ने अभिनंदन को छोड़े जाने की घोषणा नही की तो भारत पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों पर मिसाइल से हमला करे जाने की घोषणा करेगा।

यही कारण है कि इमरान खान ने हड़बड़ाते हुये संसद में विंग कमांडर अभिनंदन को भारत को सौंपने की घोषणा की और उसे 'शांति' का आवरण दिया। ताकि भारत मे बैठे पाकिस्तान के हितैषियों को नरेटिव बदलने का मौका मिल जाये और जनता भी इस प्रचार की बाढ़ में बह जाए। इसके पीछे यह सोंच थी कि जनता का ध्यान पुलवामा की 44 जवानों की लाशों और अज़हर मसूद से हट कर अभिनंदन की वापसी पर केंद्रित हो जाये और इमरान खान की छवि एक शांति का पुजारी बने और रक्तपात को जल्दी भूलने वाली जनता के लिए मोदी जी की छवि एक युद्धउन्मादी की बन जाये।

अभी रात के 11 बज रहे है और मैं सब देख व सुन रहा हूँ। अभी भी भारत मे स्थित पाकिस्तान समर्थित मीडिया और राजनैतिज्ञ विंग कमांडर अभिनंदन की भारत वापसी पर यही एजेंडा चला रहे है। लेकिन मैं बड़े विश्वास से कह सकता हूँ कि भारत द्वारा लिखी पटकथा में कोई बदलाव नही हुआ है। पाकिस्तान ने मोदी जी के चरित्र को लेकर अपने कांग्रेसी मित्रो व भारतीय मीडिया के सहयोगियों के आधार पर गलत आंकलन कर लिया है। मोदी जी, कभी भी, तमाम विघ्न आने के बाद भी, अपनी लिखी पटकथा से भटकते नही है।

मैं शिवरात्रि से तांडव व शक्ति के विहंगम नृत्य की अपेक्षा कर रहा हूँ। यह किस रूप में होगा उसकी विवेचना करने का मेरा सामर्थ नही है लेकिन जो भी होगा वह पाकिस्तान के अंधकारमय भविष्य की रचना करेगा

Friday, 1 March 2019

Memory Recall Of India

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22 मई 2004 को अटल जी की सरकार औपचारिक रूप से विदा हुई और गांधी परिवार ने श्री मनमोहन सिंह  को प्रधानमंत्री के पद पर नियुक्त किया... 2014 तक कांग्रेस की सरकार केंद्र में रही... चित्रों में दिखाई दे रहे चिथड़े हो गए मानुष याद हैं न ?? भूल गये होंगे क्योंकि हमारी स्मृति बहुत कमजोर होती है, चलिए मैं याद दिला देता हूँ।

● 15 अगस्त 2004- असम के धिमजी स्कूल में बम ब्लास्ट, 18 मरे 40 घायल
● 5 जुलाई 2005- अयोध्या में रामजन्म भूमि पर आतंकवादी हमला, 6 मरे, दर्जनों घायल
● 28 जुलाई 2005- जौनपुर में श्रमजीवी एक्सप्रेस ट्रेन में RDX द्वारा बम विस्फोट, 13 मरे, 50 घायल
● 29 अक्टूबर 2005- दीपावली के त्यौहार के दो दिन पहले दिल्ली के गोविंदपुरी की बस, पहाड़गंज और सरोजनी नगर के भीड़भाड़ वाले इलाके में सीरियल ब्लास्ट, 70 लोगों के चिथड़े उड़ा दिए गए और 250 से ज्यादा घायल हुए, तारिक अहमद डार और रफीक मास्टरमाइंड।
● 28 दिसम्बर 2005- बैंगलोर के इंस्टीट्यूट आफ साइंस पर आतंकवादी हमला, 1 मरा 4 घायल
● 7 मार्च 2006- हिंदुओं की श्रद्धा के केंद्र वाराणसी के प्रसिद्ध संकटमोचन मंदिर और भीड़भाड़ वाले कैंट रेलवे स्टेशन पर 3 बम ब्लास्ट करके 28 श्रद्धालुओं, नागरिको को बम से उड़ा दिया,101 लोग घायल हुए, लश्करे कुहाब और सिमी का हाथ।
● 11 जुलाई 2006- मुम्बई में एक साथ
माटुंगा रोड, माहिम, बांद्रा, खार रोड, जोगेश्वरी, भाइंदर, बोरिवली स्टेशनों के लोकल ट्रेन में सीरियल ब्लास्ट, 209 मरे 700 से ज्यादा घायल, फैसल शेख, आसिफ अंसारी, आसिफ खान, कमल अंसारी, एहतसाम सिद्दकी और नावेद खान घटना के प्रमुख सूत्रधार।
● 8 सितंबर 2006- मालेगांव की  मस्जिद में सीरियल ब्लास्ट, 37 मरे, 125 घायल, प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट आफ इंडिया का हाथ... बाद में चार्जशीट बदलकर हिन्दू आतंकवाद की ऐतिहासिक असफल थ्योरी बनाने की कोशिश हुई।
● 18 फरवरी 2007- समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट, 68 मरे, 50 घायल, सेना की इंटेलीजेंस ने इस्लामिक आतंकवादी संगठन लश्करे तैय्यबा का हाथ बताया... कांग्रेस ने हिन्दू आतंकवाद बनाने के चक्कर में भारतीय सेना के कर्नल श्रीकांत पुरोहित को जेल में 7 वर्ष तक भयानक यातनाएं दी... 9 वर्ष बाद पुरोहित जेल से बाहर आये।
● हैदराबाद की मक्का मस्जिद में ब्लास्ट, 16 मरे 100 घायल, हरक़त उल जिहाद अल इस्लामी का हाथ... कांग्रेस ने हिन्दू आतंकवाद की असफल थ्योरी एक बार फिर सिद्ध करने का प्रयास किया।
● 14 अक्टूबर 2007- लुधियाना के थियेटर में ब्लास्ट, 6 लोग मरे
● 24 नवम्बर 2007- उत्तर प्रदेश में लखनऊ, अयोध्या और बनारस के न्यायालयों में सीरियल बम बलास्ट, 16 मरे 79 घायल
● 1 जनवरी 2008- रामपुर उत्तर प्रदेश में CRPF कैम्प पर हमला, 8 मरे 7 घायल, लश्करे तय्यबा का हाथ।
● 13 मई 2008- जयपुर के छोटी चौपड़, बड़ी चौपड़, मानकपुर पुलिस स्टेशन एरिया, जौहरी बाजार, त्रिपोलिया बाजार, कोतवाली क्षेत्र में RDX द्वारा 9 जगहों पर सीरियल ब्लास्ट, 63 मरे, 200 घायल, हरकत-उल-जिहाद उल इस्लामी ने ली जिम्मेदारी।
● 25 जुलाई 2008- बैंगलुरु में में 8 सीरियल ब्लास्ट, 2 मरे 20 घायल
● 26 जुलाई 2008- गुजरात के अहमदाबाद में 17 जगहों पर सीरियल बम ब्लास्ट, 35 मरे 110 घायल... मुफ़्ती अबू बशीर मास्टर माइंड... अब्दुल कादिर, हासिल मोहम्मद, हुसैन इम्ब्राहीम ने मिलकर कराची (पाकिस्तान) में बैठे नेटवर्क की सहायता से बम विस्फोट किये।
● 13 सितंबर 2008- दिल्ली के गफ्फार मार्केट, बारहखम्भा रोड, GK1, सेंट्रल पार्क में 31 मिनट के अंदर 5 बम ब्लास्ट हुए, 4 अन्य बम निष्क्रिय किये गए, 33 मरे और 150 से ज्यादा घायल... स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट आठ इंडिया के आउटफिट इंडियन मुजाहिद्दीन ने किये ब्लास्ट।
● 27 सितंबर 2008- दिल्ली महरौली के इलेक्ट्रानिक मार्केट में 2 बम ब्लास्ट, 3 मरे और 33 घायल।
● 1 अक्टूबर 2008- अगरतल्ला में बम विस्फोट, 4 मरे 100 घायल
● 21 अक्टूबर 2008- इम्फाल में बम विस्फोट, 17 मरे 50 घायल
● 30 अक्टूबर 2008- असम में बम विस्फोट, 81 मरे और 500 से ज्यादा घायल
● 28 नवम्बर 2008- मुम्बई हमला ताज होटल, ओबेराय होटल, कामा हॉस्पिटल, नरीमन हाउस, लियोपोल्ड कैफे, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस पर आतंकवादी हमला, 166 लोग मारे गए 600 से ज्यादा घायल।
● 1 जनवरी 2009- गुवाहाटी में बम ब्लास्ट, 6 मरे 67 घायल
● 6 अप्रैल 2009, गुवाहाटी में बम ब्लास्ट, 7 मरे 62 घायल
● 13 फरवरी 2010- पुणे की जर्मन बेकरी में बम ब्लास्ट,17 मरे 70 घायल... सिमी इंटरनेशनल मुजाहिद्दीन इस्लामिक मुस्लिम फ्रंट के भारतीय शाखा द्वारा किया गया बम ब्लास्ट।
● 7 दिसम्बर 2010-  दशास्वमेध घाट पर गंगा आरती के समय बम ब्लास्ट, 3 मरे 36 घायल... स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट आफ इंडिया के आउटफिट इंडियन मुजाहिद्दीन ने किये ब्लास्ट।
● 13 जुलाई 2011- मुबई के ओपेरा हाउस, जावेरी बाज़ार और दादर एरिया में भीषण बेम ब्लास्ट, 26 मरे 130 लोग घायल... स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट आफ  इंडिया के आउटफिट इंडियन मुजाहिद्दीन ने किये ब्लास्ट।
● 7 सितंबर 2011- दिल्ली हाईकोर्ट में बम ब्लास्ट, 17 मरे और 180 लोग घायल... हरकत उल जिहाद अल इस्लामी के आउटफिट का भारतीय मेडिकल छात्र वसीम अकरम मालिक बम बलास्ट का मास्टरमाइंड।
● 13 फरवरी 2011- इजराइली डिप्लोमेट की कार को बम से उड़ाने का प्रयास, बम सही से फटा नहीं, 4 घायल... भारतीय पत्रकार मुहम्मद अहमद काज़मी की संलिप्तता।
● 1 अगस्त 2012- पुणे ब्लास्ट, स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट आफ  इंडिया के आउटफिट इंडियन मुजाहिद्दीन ने किये ब्लास्ट।
● 21 फरवरी 2013- हैदराबाद की हैदाराबाद में 2 बम ब्लास्ट, 18 मरे और 131 घायल... इंडियन मुजाहिद्दीन का फाउंडर यासीन भटकल, असदुल्लाह अख्तर, तहसीन अख्तर, एजाज शेख बम ब्लास्ट के मास्टरमाइंड।
● 17 अप्रैल 2013- बैंगलोर में बम ब्लास्ट,14 लोग गंभीर रुप से घायल
● 7 जुलाई 2013- बोधगया मे ब्लास्ट, 5 लोग गंभीर रूप से घायल... म्यांमार में रोहंगिया आतंकवादियों के खिलाफ हुई कार्यवाही के विरोध में भारत के बिहार के बोध गया में उमर सिद्दीकी, अजहरुद्दीन कुरैशी, मुजीबुल्लाह अंसार, हैदर अली, इम्तियाज अंसारी ने बिहार को दहलाने की रची थी साजिश।
● 27 अक्टूबर 2013- को पटना में, नरेंद्र मोदी की रैली में इंडियन मुजाहिद्दीन द्वारा 8 बम ब्लास्ट, 6 मरे 85 घायल...लाखों की भीड़ में भगदड़ मचा कर हजारों को मारने की साजिश... मोदी और मैनेजरों की समझदारी से भगदड़ नही मची... मोहम्मद तहसीन अख्तर मास्टरमाइंड... चिकमंगलूर मदरसे से प्रेरित होकर किया ब्लास्ट... मुज़्बुल्ला, हैदर अली, नुमान, तारिक अंसारी ब्लास्ट के बाद फरार।
● 1 मई 2014- चेन्नई में गुवाहाटी बैंगलोर एक्सप्रेस में बम बलास्ट, 2 मरे 14 गंभीर रूप से घायल।

इन आंकड़ों में 10 वर्ष में हुए वामपंथी माओवादियों द्वारा किये गए हमले और जम्मू कश्मीर में किये गए हमले शामिल नहीं है, क्योंकि वो अलग विषय है।

यहां एक बात और याद दिलाना जरूरी है कि जब बाटला हाउस एनकाउंटर हुआ था और इंडियन मुजाहिदीन के आतंकवादी उस में मारे गए तो तत्कालीन कांग्रेस की मुखिया श्रीमती सोनिया गांधी उन आतंकवादियों की लाशों को देखकर फूट फूट कर रोई थी, जैसे कि कोई अपने घर का चला गया हो।

 2014 में मोदी के आने के बाद से  Jan  2019 में इस लेख के लिखे जाने तक मुझे याद नहीं कि दिल्ली की सड़कों, हैदराबाद, अहमदाबाद और अयोध्या के चौराहों पर, जयपुर और बनारस की गलियों में कोई ऐसा बम ब्लास्ट हुआ हो, जहां कोई मंदिर या मस्जिद जाने वाला, कोई दिवाली के लिए खरीदारी करने वाला, कोई रेस्टोरेंट में अपने परिवार के साथ बैठा व्यक्ति या मुम्बई की लोकल ट्रेन में यात्रा करता एक नागरिक बम ब्लास्ट में चीथड़े हो जाए और अगले दिन वह नहीं बल्कि उसकी लाश उसके घर पहुंचे। 

जानते हैं क्यों ?? क्योंकि इस देश में आम चुनाव द्वारा *इलैक्टेड प्रधानमन्त्री* Narendra Modi का राज है... जबकि आज से पहले आतंकवादियों के लाश पर आँसू बहाने वालों द्वारा *सलेक्टेड प्रधानमंत्री* का राज था... राजनाथ सिंह को हमने बहुत बार *निंदानाथ* कहा... परन्तु गृहमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल सफल रहा कि देश के अंदर वो रक्तपात नही हुआ, जिसका गवाह ये देश 2004 से 2014 तक बना... मेरे लिए तो यही एक कारण काफी है कि तमाम असहमतियों के बाद भाजपा को वोट दिया जाए... किसी भी मंदिर मस्जिद या विकास को देखने के लिए आपके और आपके परिवार का जीवित रहना बहुत जरूरी है... बाकि आप वोट जरूर करें, सोच समझकर करें, अपना निर्णय स्वयं लें

पाकिस्तान से समझौता करने की जल्दबाजी में इंदिरा गांधी इतनी अंधी बहरी क्यों हो गयी थीं?

आज एक विंग कमांडर अभिनंदन को बंदी बनाए जाने तथा उनकी रिहाई को लेकर सरकार के खिलाफ राजनीतिक मातम और मीडियाई ताण्डव करने का घृणित पाखंड कर रही कांग्रेस शायद भूल गयी है कि जो 54 युद्धबंदी इंदिरा गांधी की तत्कालीन कांग्रेसी सरकार की घातक शर्मनाक अनदेखी और आपराधिक लापरवाही के कारण आजतक लौटकर अपने घर वापस नहीं आ सके, उनमें भी एक विंग कमांडर हरसरन सिंह गिल तथा 4 स्क्वाड्रन लीडर समेत वायुसेना के 25 पायलट शामिल हैं। उनके परिजन आज 48 साल बाद भी इंदिरा गांधी की उस कांग्रेसी सरकार की प्राणघातक करतूत के पाप की आग में जल रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि 1971 के भारत पाक युद्ध में बंदी बनाए गए 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों तथा 3800 भारतीय सैनिकों के प्राणों की कीमत चुका कर भारतीय सेना द्वारा कब्ज़ा की गई पाकिस्तानी भूमि को 1972 में बिना शर्त वापस करने की जल्दबाजी में इंदिरा गांधी इतनी अंधी बहरी हो गयी थीं कि उनको भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर हरसरन सिंह गिल, फ्लाइट लेफ्टिनेंट वी. वी. तांबे और फ्लाइंग ऑफिसर सुधीर त्यागी तथा भारतीय सेना के कैप्टन गिरिराज सिंह, कैप्टन कमल बख्शी समेत उन 54 भारतीय युद्धबंदियों की रिहाई की याद नहीं आयी जो पाकिस्तानी जेलों में बंद थे और जिनके बंद होने के पुख्ता प्रमाण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध थे।

उल्लेखनीय है कि फ्लाइट लेफ्टिनेंट वी. वी. तांबे का नाम 5 दिसंबर 1971 को पाकिस्तान के ऑब्जर्वर अखबार में फ्लाइट लेफ्टिनेंट तांबे के नाम से प्रकाशित हुआ था। अखबार रिपोर्ट में कहा गया था कि 5 भारतीय पायलट पाकिस्तान के कब्जे में हैं। लेकिन पाकिस्तान ने युद्ध बंदियों की सूची में इनको नहीं दिखाया और इंदिरा गांधी भी उन भारतीय सैनिकों को रिहा कराना भूल गई थीं। उल्लेखनीय है कि फ्लाइट लेफ्टिनेंट वी.वी. तांबे की पत्नी साधारण महिला नहीं है। 1971 में वो अंतरराष्ट्रीय ख्याति की बैडमिंटन खिलाड़ी थीं तथा बैडमिंटन की राष्ट्रीय महिला चैम्पियन थीं। अतः उन्होंने हर उच्च स्तर तक  गुहार लगाई थी लेकिन परिणाम शून्य ही रहा।

इसी तरह युद्ध की समाप्ति के 11 दिन पश्चात 27 दिसम्बर 1971 को भारतीय सेना के मेजर ए.के. घोष का पाकिस्तान की जेल में बंदी अवस्था का चित्र विश्वविख्यात अमेरिकी पत्रिका TIMES ने प्रकाशित किया था। लेकिन 93000 पाकिस्तानियों को रिहा करने का समझौता करते हुए इंदिरा गांधी को मेजर घोष याद नहीं रहे थे।

ज्ञात रहे कि 4 मार्च 1988 को पाकिस्तान की जेल से रिहा होकर भारत आये दलजीत सिंह ने बताया था कि उसने फ्लाइट लेफ्टिनेंट वी.वी. तांबे को लाहौर के पूछताछ केंद्र में फरवरी 1978 में देखा था। 5 जुलाई 1988 को पाकिस्तानी कैद से रिहा होकर भारत वापस लौटे मुख्तार सिंह ने बताया था कि कैप्टन गिरिराज सिंह कोट लखपत जेल में बंद हैं। मुख्तार ने 1983 में मुल्तान जेल में कैप्टन कमल बख्शी को भी देखा था। उस समय उनके मुताबिक बख्शी मुल्तान या बहावलपुर जेल में हो सकते हैं। इसी तरह के कई और चश्मदीद लोगों की रिपोर्ट भी अलग अलग समय पर उन 54 भारतीय युद्धबंदियों के परिजनों के पास लगातार आती रहीं हैं।

फ्लाइंग ऑफिसर सुधीर त्यागी का विमान भी 4 दिसंबर 1971 को पेशावर में फायरिंग से गिरा दिया गया था और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। अगले दिन पाकिस्तान रेडियो ने इस बारे में घोषणा की थी तथा पाकिस्तानी अखबारों ने भी इस खबर को छापा था। इसके बावजूद पाकिस्तान लगातार यही कहता रहा है कि ये 54 लोग उसकी जेलों में बंद नहीं हैं, जबकि उनके परिजनों का मानना था कि ये लोग पाकिस्तान की जेलों में कैद हैं।

अतः आज पूरा देश कांग्रेस से यह जानना चाहता है कि 1972 में पाकिस्तान से समझौता करने की जल्दबाजी में इंदिरा गांधी इतनी अंधी बहरी क्यों हो गयी थीं?

विशेष: उन 54 युद्धबंदियों की पूरी सूची का लिंक नीचे देखिये। इस कांग्रेसी कुकर्म और करतूत की कहानी से आज हर भारतीय का अवगत होना जरूरी है ।

भारतीय सेना 10 सर्वश्रेष्ठ अनमोल वचन: अवश्य पढें


1.
" *मैं तिरंगा फहराकर वापस आऊंगा या फिर तिरंगे में लिपटकर आऊंगा, लेकिन मैं वापस अवश्य आऊंगा।*"
- कैप्टन विक्रम बत्रा,
  परम वीर चक्र

2.
" *जो आपके लिए जीवनभर का असाधारण रोमांच है, वो हमारी रोजमर्रा की जिंदगी है।* "
- लेह-लद्दाख राजमार्ग पर साइनबोर्ड (भारतीय सेना)

3.
" *यदि अपना शौर्य सिद्ध करने से पूर्व मेरी मृत्यु आ जाए तो ये मेरी कसम है कि मैं मृत्यु को ही मार डालूँगा।*"
- कैप्टन मनोज कुमार पाण्डे,
परम वीर चक्र, 1/11 गोरखा राइफल्स

4.
" *हमारा झण्डा इसलिए नहीं फहराता कि हवा चल रही होती है, ये हर उस जवान की आखिरी साँस से फहराता है जो इसकी रक्षा में अपने प्राणों का उत्सर्ग कर देता है।*"
- भारतीय सेना

5.
" *हमें पाने के लिए आपको अवश्य ही अच्छा होना होगा, हमें पकडने के लिए आपको तीव्र होना होगा, किन्तु हमें जीतने के लिए आपको अवश्य ही बच्चा होना होगा।*"
- भारतीय सेना

6.
" *ईश्वर हमारे दुश्मनों पर दया करे, क्योंकि हम तो करेंगे नहीं।"*
- भारतीय सेना

7.
" *हमारा जीना हमारा संयोग है, हमारा प्यार हमारी पसंद है, हमारा मारना हमारा व्यवसाय है।*
- अॉफीसर्स ट्रेनिंग अकादमी, चेन्नई

8.
" *यदि कोई व्यक्ति कहे कि उसे मृत्यु का भय नहीं है तो वह या तो झूठ बोल रहा होगा या फिर वो इंडियन आर्मी का  ही होगा।*"
- फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ

9.
" *आतंकवादियों को माफ करना ईश्वर का काम है, लेकिन उनकी ईश्वर से मुलाकात करवाना हमारा काम है।*"
- भारतीय सेना

10.
" *इसका हमें अफसोस है कि अपने देश को देने के लिए हमारे पास केवल एक ही जीवन है।*"

💐💐 🙏🙏🙏 💐💐
सबको इंडियन आर्मी से रूबरू कराये।

।।जयहिंद......
    ⚔ भारतीय थल सेना ⚔

ऐतिहासिक व वर्तमान परिवेश में जाट समाज

जब भी मैं जाटों के बारे में लिखता हूँ तो समझा जाना चाहिए कि मैं भारत के वजूद की बात कर रहा हूँ।ज्ञात इतिहास के पन्नों,उजले लम्हों की बात करते है छोटे-छोटे कबीलों व जनपदों का एकीकरण करके चंद्रगुप्त मौर्य मगध साम्राज्य खड़ा करता है।आजादी के आंदोलन की महत्वपूर्ण डोर समझे जाने वाले गांधीजी ने अपना सफर अहिंसा से शुरू किया 1942में "करो या मरो"का नारा देकर हिंसा पर खत्म किया था।चंद्रगुप्त मौर्य ने हिंसा को खत्म करने के लिए हिंसा का रास्ता अख्तियार किया और इस सफर को महान सम्राट अशोक ने कलिंग युद्ध जीतकर अहिंसा पर खत्म किया।

तमाम इतिहासकारों ने सिकंदर को इतना महान घोषित किया कि तत्कालीन समय मे उसके मुकाबले कोई राजा नहीं था मगर झेलम नदी के किनारे जब जाट राजा पौरस के एक वार से ही सिकंदर घोड़ी से गिर पड़ा और उस चोट से ही दुनियां से रुखसत हो गया।

78ईसवी में महान जाट राजा कनिष्क  ने शक संवत चलाया जिस आज भारतीय पंचांग के रूप में उपयोग किया जाता है।कनिष्क को भारतीय इतिहाड़कारों ने कोई जगह नहीं दी मगर अफगानिस्तान के स्कूली पाठ्यक्रम में बड़ी शान से पढ़ाया जाता है क्योंकि उन लोगों उपासना पद्धति नई अपनाई है अपने पुरखों को नहीं भूले है।

57बीसी में मालवा में महान जाट राजा विक्रमादित्य हुए जिसने विक्रम संवत चलाया था और यह भारतीय पंचांग का आधार बन गया।उनकी ताकत,न्यायप्रियता व शोहरत ऐसी थी कि उनका नाम एक उपाधि बन गया और बाद के राजा अपने नाम के साथ विक्रमादित्य को उपाधि के रूप में प्रयोग करते थे।

सातवीं सदी में महान जाट राजा हर्षवर्धन हुए जिसे दोगले इतिहासकार इतिहास में उचित जगह देने में नाकाम हो गए थे।वर्तमान अफगानिस्तान के छोटे से इलाके गजनी का एक लुटेरा दूसरे लुटेरों को एकत्रित करता हुआ 1025 में शान से सोमनाथ का मंदिर लूटकर चला गया और सिंध-मुल्तान के जाटों ने उस धन को वापिस लूटा व घायलावस्था में गजनी की मौत हो गई।गजनी का अफगानिस्तान के इतिहास में कहीं कोई जिक्र नहीं है मगर भारतीय इतिहासकारो ने अपने राजाओं की नाकामी व पोंगा-पंथियों के षड्यंत्र को कमतर न बताने के चक्र में महमूद गजनी को महान राजा बनाकर भारतीय जनमानस के सामने पेश कर दिया।

1192 में मुहम्मद गोरी ने पृथ्वीराज चौहान की हत्या कर दी थी और तमाम जयचंद तमाशबीन बन गए थे।भले ही उस समय किसी जाट राजा के हाथ मे कोई साम्राज्य न रहा हो मगर रामलाल खोखर के नेतृत्व में कुछ जाट किसान जुटे और 1206ईसवी में गौरी की हत्या करके पृथ्वीराज चौहान की मौत का बदला लिया।

आपस मे सत्ता की लालसा में लड़ रहे स्थानीय राजाओं की फुट की बदौलत एक लुटेरा तैमूर लंग आता है और लूट-खसोट शुरू कर देता है तो जाट हरवीर गुलिया किसानों को एकत्रित करके तैमूर लंग को मौत के घाट उतार देता है।

महाराजा सूरजमल,महाराजा जवाहर सिंह का इतिहास कौन नहीं जानता है!जब रियासतों की अधीनता स्वीकार करने व गुलामी के टैक्स वसूली कार्यकर्ता बनने के लिए मुगल दरबार मे बहन-बेटियों की डोलियां भेजी जा रही थी उस समय एक ब्राह्मण बेटी हरदौली को छुड़ाने के लिए भरतपुर का जाट राजा दिल्ली पर चढ़ाई करता है।महाराजा रणजीत सिंह लाहौर को अपनी राजधानी बनाकर अफगानिस्तान तक राज करते है।अभेद्य कश्मीर को पहली बार जाट हरिसिंह नलवा ही जीतता है।जब देशी राजा भाड़े के कार्यकर्ता बन गए तो बृजमंडल से जाट वीर गोकुला किसानों पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ खड़ा होकर लड़ता है।

अपना जीवित कतरा-कतरा मानवता के लिए कुर्बान कर दिया मगर किसी उपासना पद्धति तले आने से इनकार कर दिया।धार्मिक कट्टरता के खिलाफ राजाराम जाट खड़ा होता है और औरंगजेब को आइना दिखाते हुए अकबर का मकबरा खोदकर अस्थियां निकालकर जला डालता है।

इस अमर बलिदानी कौम के बारे में लिखना शुरू करता हूँ तो हर अगली लाइन लिखते हुए एक जाट की महान कुर्बानी कुछ लिखने को मजबूर करती जाती है।1857की क्रांति के बारे में लिखना शुरू करता हूँ तो हर कस्बे से नाहर सिंह तेवतिया जैसे शूरमा मेरी कलम खींचते जाते है तो पटियाला के राजा जाट भूपेंद्रसिंह जैसे रोल्स रॉयस कारों को कूड़ेदान बनाकर अपने स्वाभिमान को अम्बर में रखते नजर आते है।

आजादी के आंदोलन के आईने से चंद कांग्रेसी नेताओं को किनारे कर दें तो हर इलाके से आजाद हिंद फौज के संस्थापक राजा महेंद्र प्रताप आपको नजर आते है तो हर खेत-खलिहान से अंग्रेजों के खिलाफ उठती बगावत की आंधी नजर आती है।

हर कालखंड में जब भी किसी भी राजा ने जनता पर अत्याचार किए तो जाट किसानों ने उसका मुकाबला किया।हर कालखंड में जब देशी राजाओं की आपसी फूट के कारण विदेशी लुटेरों ने वतन पर घात लगाया तो जाटों ने वतन की आबरू की हिफाजत की।जब-जब जरूरत पड़ी तब-तब अप्रशिक्षित किसान सैनिक बने और दो-दो हाथ करने को आगे आये।जब सरकारों को जरूरत पड़ी तो प्रशिक्षित जाट रेजिमेंट के रूप में दुनियाभर में अपने शौर्य की अमर गाथा लिख डाली।चाहे पिछले साल डोकलाम में खड़ा होना हो या अभी पुलवामा अटैक के बाद कश्मीर जाना हो सबसे पहले जाट रेजिमेंट ही पहुंचती है।

आज मेरा इरादा इतिहास लिखना नहीं है बल्कि जाट युवा कुछ भूल गए है उनको कुछ याद दिलाना चाहता हूँ।युवाओं से कहना चाहता हूँ कि अपने पुरखों की जीवनियां पढ़ो,उनके आदर्शों को पढ़ो और अपने जीवन मे ढालो!सियासत के चंद गद्दारों व धर्म के सौदागरों द्वारा तैयार हवाओं के साथ बहने की भूल मत करो!तुम इस देश का वजूद हो और तुम्हारे कंधो पर इस वतन की हिफाजत का,अमर तिरंगे को थामकर रखने का भार है।

जिन सीनों ने कभी न पूछा,गोली का अंजाम क्या है!
उसकी औलादें पूछ रही है,मजहब-ए-निजाम क्या है?

 कितने बड़े शर्म की बात है!राजा जवाहर सिंह की माँ ने एक उलाहना दिया था कि तेरे बाप की पगड़ी दिल्ली में पड़ी और तूं अपनी पगड़ी सजा रहा है तो जवाहरसिंह ने दिल्ली को उधेड़कर रख दिया था और आज गद्दारों के षड्यंत्र द्वारा सैंकड़ों जाट युवा हरियाणा की जेलों में पड़े है मगर जाट युवा मुँह पर मूच्छों के ताव लगाकर कह रहे है जाट बलवान,जय भगवान!

बच्चों के पापा घर कब आएंगे
पूछ रही तुम्हारी बहन-बेटियां पनघट पर!
तुम भेजने में लगे हो गुंडों को
विधानसभा और संसद की चौखट पर!!

 कब सवाल करोगे?कब उठोगे?कब जागोगे?आज मैं तुम्हारा मनोरंजन करने के लिए कुछ नहीं लिखूंगा।मेरी कलम आज मेरा दर्द उगलेगी,समाज का सच उगलेगी जिसे तुम्हे स्वीकार करना ही होगा!

तूफान रुके,लश्कर रुके,
मगर रुकेगी इस कलम की धार नहीं!
मुझे मंजिल का सिरा चाहिए
यह शर्मिदगी भरी मझधार नहीं!!

आज तुम हिन्दू बनकर मंदिर बनाने निकले हो तो मुस्लिम बनकर मस्जिद की जंग लड़ रहे हो!तुम हिन्दू-मुस्लिम की जंग लड़ रहे हो तो तुमसे मेरे कुछ सवाल भी है और कुछ नसीहतें भी!

क्यों नफरत की बू आती है पुरोहित और पुजारी से
क्यों प्रवचनी जहर फैलाते चौक और चौबारों से?
क्यों जिहादी तहरीरें होती मुल्ले और मौलवीयों से
क्यों देश विरोधी नारे गूंजते मस्जिद की दीवारों से??

जाट युवाओं तुम्हारे पुरखों का धर्म प्रकृति रही है,मानवता रही है इंसानियत रही है उनको पढ़ लो!यह धर्म का धंधा तुम्हारे बाप-दादाओं के सिलेबस में नहीं था तुम क्यों इतने उतावले हो रहे हो?हम इस देश का सबसे बड़ा मूलनिवासी समुदाय है।हमने प्रकृति पूजा भी भी देखी,बौद्ध व जैन धर्म भी देखे तो नास्तिक आजीवक सम्प्रदाय भी देखें है।हमने ब्राह्मण धर्म देखा है तो इस्लाम व ईसायत भी देखी है।जब धर्म की जकड़न हमारे ऊपर बढ़ती तो हमारे पुरखे उसके खिलाफ बगावत करते नजर आते है।मगर बड़ा दुःख होता है कि जिसके हाथों में अमर तिरंगा है वो तिरंगा छोड़कर धार्मिक झंडा उठाये घूम रहे है!

मेरे जाट वीरों!घना अंधेरा दिखे
तो मुझे तुम एक महान दहेज दो!
तोड़ दो ये धर्म के बंधन अब तुम
एक बार मेरे भगत को संसद भेज दो!!

अंत मे मैं इतना ही कहना चाहता हूँ कि

जाट युवाओं देख लो,
मेरी व्यथा अब तुम्हारे दरबार मे है!
तुम्हारी लाशों से सरकार बनी
और कातिल अब सरकार में है!!